घर पर घी कैसे बनाएं: मलाई से घी बनाने का गाँव वाला तरीक़ा

घर पर घी कैसे बनाएं, इसका गाँव वाला तरीक़ा सीधा है: एक-दो हफ़्ते मलाई इकट्ठी कीजिए, एक चम्मच दही डालकर जमाइए, ठंडे पानी के साथ बिलोकर मक्खन निकालिए, और मक्खन को धीमी आँच पर तब तक पकाइए जब तक घी साफ़ न हो जाए और सोंधी ख़ुशबू न आने लगे। फिर छान लीजिए। 500 ग्राम मलाई से लगभग 200 से 250 ग्राम घी निकलता है।
हमारी रसोई में घी की शुरुआत फ़्रीज़र के पीछे रखे स्टील के एक डिब्बे से होती है। रोज़ सुबह उबले और ठंडे हुए दूध के ऊपर से मोटी मलाई चम्मच से उतारकर उस डिब्बे में डाल दी जाती है। दूसरे इतवार तक डिब्बा भर जाता है, और उस दोपहर पूरा घर घी की ख़ुशबू से महक उठता है। घर पर घी कैसे बनाएं, इसका यही तरीक़ा आज भी ज़्यादातर राजस्थानी घरों में चलता है: मलाई का दही जमाओ, बिलोकर मक्खन निकालो, धीमी आँच पर पकाओ। हमारा दानेदार घी भी इसी रास्ते से बनता है, बस कढ़ाई बड़ी होती है।
क्या-क्या चाहिए
- उबले हुए फ़ुल क्रीम दूध की मलाई, शुरुआत के लिए लगभग 500 ग्राम (दो-तीन कटोरी)
- जमाने के लिए 1 बड़ा चम्मच दही
- बर्फ़ जैसा ठंडा पानी, लगभग 2 से 3 कप
- लकड़ी की मथानी, फेंटने वाला व्हिस्क, या मिक्सी का जार
- मोटे तले की कढ़ाई या पतीला
- स्टील की छलनी या साफ़ मलमल का कपड़ा, और एकदम सूखा काँच या स्टील का जार
भैंस के दूध की मलाई मोटी भी आती है और ज़्यादा भी। गाय के दूध से मलाई कम आती है, पर घी ज़्यादा सुनहरा बनता है।
घर पर घी कैसे बनाएं: मलाई से घी बनाने का पूरा तरीक़ा
- मलाई इकट्ठी कीजिए। दूध उबालिए, ठंडा कीजिए, रात भर फ़्रिज में रखिए और सुबह ऊपर जमी मलाई उतार लीजिए। इसे फ़्रीज़र में रखे एक ही साफ़ डिब्बे में डालते जाइए। एक से दो हफ़्ते की मलाई सबसे ठीक रहती है। इससे बहुत पुरानी मलाई में फ़्रिज की गंध आ जाती है।
- कमरे के तापमान पर लाइए। जिस दिन बिलोना हो, उससे पहले की शाम डिब्बा बाहर निकाल लीजिए और मलाई को कुछ घंटे नरम होने दीजिए।
- दही डालकर जमाइए। हर 500 ग्राम मलाई में लगभग एक बड़ा चम्मच दही मिलाइए, ढककर किसी गरम कोने में 8 से 12 घंटे रख दीजिए। सर्दी में ज़्यादा समय लगता है, या चूल्हे के पास रखिए। जब हल्की खट्टी ख़ुशबू आए और मलाई गाढ़ी हो जाए, तो समझिए जम गई। इसी से घी में दही वाली भरी-भरी ख़ुशबू आती है।
- बिलोइए। एक कप बर्फ़ जैसा ठंडा पानी डालकर बिलोइए। पुराने तरीक़े से मथानी को दोनों हथेलियों के बीच घुमाइए, या मिक्सी को धीमी रफ़्तार पर रुक-रुककर चलाइए। कुछ ही मिनट में मिश्रण गाढ़ा होता है और फिर अचानक फट जाता है: हल्के पीले मक्खन के लौंदे पतली सफ़ेद छाछ में ऊपर तैरने लगते हैं। मक्खन को इकट्ठा होने में मदद के लिए एक कप ठंडा पानी और डालिए।
- मक्खन धोइए। हाथ से मक्खन निकालकर ठंडे पानी के कटोरे में डालिए। उसे दबाइए, धुंधला पानी फेंकिए, और दो-तीन बार ऐसा कीजिए जब तक पानी लगभग साफ़ न रहे। मक्खन में बची छाछ ही घर के घी के जलने या ख़राब होने की सबसे बड़ी वजह है।
- धीमी आँच पर पिघलाइए। मक्खन को मोटे तले की कढ़ाई में धीमी से मध्यम आँच पर रखिए। वह पिघलता है, फिर झाग बनता है और पानी उड़ते समय ज़ोर से चटर-पटर करता है। बीच-बीच में चलाते रहिए।
- बदलाव देखते रहिए। बड़ा झाग बैठ जाता है, चटर-पटर धीमी पड़ती है और घी साफ़ होने लगता है। दूध के ठोस हिस्से नीचे बैठते हैं और सफ़ेद से धीरे-धीरे हल्के सुनहरे-भूरे होते जाते हैं, और ख़ुशबू मक्खन जैसी से बदलकर सोंधी, भुनी हुई हो जाती है। मात्रा के हिसाब से इसमें 20 से 40 मिनट लगते हैं।
- सही समय पर उतारिए। जब नीचे की खुरचन सुनहरी-भूरी हो, गहरी भूरी नहीं, तब गैस बंद कर दीजिए। गैस बंद होने के बाद भी गरम घी एक-दो मिनट उसे पकाता रहता है। कुछ घरों में इस समय ख़ुशबू के लिए कुछ करी पत्ते या एक पान का पत्ता डाल देते हैं।
- छानिए और ठंडा कीजिए। पाँच मिनट बैठने दीजिए, फिर छलनी या मलमल से सूखे जार में छान लीजिए। कमरे के तापमान पर आने तक जार खुला रखिए, फिर ढक्कन लगाइए।
1 किलो मलाई से कितना घी निकलता है?
यह हर बार अलग होता है, इसलिए इन्हें मोटा अंदाज़ा मानिए। 500 ग्राम अच्छी गाढ़ी मलाई से आम तौर पर 200 से 250 ग्राम घी निकलता है, यानी एक किलो से लगभग 400 से 500 ग्राम। भैंस की मलाई ज़्यादा चिकनी होती है, उससे ऊपर वाली मात्रा मिलती है। टोंड दूध की पतली मलाई से, या जिस मलाई में दूध ज़्यादा रह गया हो, उससे कम घी निकलता है। अगर पहले से बिलोया हुआ मक्खन है, तो उसके वज़न का लगभग तीन-चौथाई घी मिलने की उम्मीद रखिए।
क्या घर पर घी बनाना ख़रीदने से सस्ता पड़ता है?
अगर घर के लिए फ़ुल क्रीम दूध पहले से आता है, तो मलाई मुफ़्त का बोनस है, और घर का घी बस गैस और एक दोपहर का ख़र्च है। तब बनाना पूरी तरह फ़ायदे का सौदा है। पर अगर घी बनाने के लिए अलग से क्रीम या मक्खन ख़रीदते हैं, तो वह अक्सर अच्छे जार से बहुत सस्ता नहीं पड़ता, और समय अलग लगता है।
घर की रसोई की एक हद भी है। मलाई से बना घी, घी की बस एक क़िस्म है। पूरे दूध वाला बिलोना घी, जिसमें सारा दूध दही बनाकर बिलोया जाता है, उसमें एक किलो के लिए 25 से 30 लीटर देसी गाय का दूध लगता है, जो शहर के कम ही घर कर पाते हैं। यह तरीक़ा हमने बिलोना घी क्या है में समझाया है। जब मलाई का डिब्बा जल्दी नहीं भरता, या त्योहार पर घी ज़्यादा चाहिए, तब ख़रीदना समझदारी है।
दानेदार या चिकना: घी कैसे जमेगा
दानेदार घी चाहिए तो दाना धीरे ठंडा होने से बनता है, मलाई या दही से नहीं। जार को रसोई की किसी शेल्फ़ पर, फ़्रिज, पंखे और खिड़की से दूर, ठंडा होने दीजिए और एक दिन तक हिलाइए मत। गरम-गरम फ़्रिज में रख दिया तो घी चिकना जमेगा। इसके पीछे का विज्ञान हमारे लेख दानेदार घी में है।
बची छाछ और खुरचन का क्या करें
कुछ भी बेकार नहीं जाता। बिलोने के बाद जो पतला पानी बचता है, वह छाछ है। नमक और भुना जीरा डालकर पी लीजिए, या कढ़ी बना लीजिए। घी छानने के बाद कढ़ाई में जो भूरे दाने बचते हैं, वह खुरचन है, यानी दूध के भुने हुए ठोस हिस्से जिन पर अब भी घी लगा होता है। इसमें थोड़ी चीनी मिल जाए, तो हमारे गाँव के बच्चे इसी के लिए रसोई के चक्कर काटते रहते हैं। इस पर पूरा लेख है घी की खुरचन।
घर पर घी बनाते समय होने वाली आम ग़लतियाँ
- तेज़ आँच। पानी उड़ने से पहले ही खुरचन जल जाती है, और घी कड़वा और धुएँ जैसा लगता है। हमेशा धीमी आँच पर, आराम से।
- ज़्यादा देर पकाना। गहरी भूरी या काली खुरचन का मतलब घी जल गया। सुनहरी-भूरी पर ही रुक जाइए।
- जल्दी उतार लेना। घी अभी धुंधला हो या चटर-पटर कर रहा हो, तो उसमें पानी बचा है, और कुछ हफ़्तों में वह खट्टा हो सकता है या फफूँद लग सकती है।
- बिना धोया मक्खन। अंदर बची छाछ नीचे लगकर जलती है और घी ख़राब करती है।
- गीला जार या गीला चम्मच। पानी की कुछ बूँदें भी घी की उम्र घटा देती हैं। बाक़ी बातें घी को कैसे स्टोर करें में हैं।
- पुरानी मलाई। महीने भर रखी मलाई में जो गंध आ जाती है, वह सीधी घी में जाती है।
बाज़ार के मक्खन से जल्दी घी
मलाई नहीं है? बिना नमक वाला मक्खन (अनसॉल्टेड बटर) भी चलता है। 500 ग्राम मक्खन मोटे पतीले में धीमी आँच पर रखिए। वह पिघलेगा, झाग बनेगा, शांत होगा, और लगभग 15 से 20 मिनट में नीचे की खुरचन सुनहरी हो जाएगी। छान लीजिए, लगभग 400 ग्राम घी मिल जाएगा। नमक वाला मक्खन मत लीजिए, उसकी खुरचन नमकीन बनती है और घी का स्वाद भी अजीब हो सकता है।
मक्खन वाले घी का स्वाद मलाई-दही वाले घी से हल्का और सादा होता है, क्योंकि इसमें न दही जमता है, न बिलोना होता है। रोज़ के खाने के लिए यह बिल्कुल ठीक है। दही से ख़ुशबू क्यों बदलती है, यह जानना हो तो पढ़िए दही से घी और क्रीम से घी। घर पर दो-चार बार घी बना लिया, तो आप हर जार को उसकी ख़ुशबू और दाने से परखने लगेंगे।
लोग ये भी पूछते हैं
घर पर मलाई से घी कैसे बनाएं?
एक-दो हफ़्ते मलाई फ़्रीज़र में इकट्ठी कीजिए, एक चम्मच दही डालकर 8 से 12 घंटे जमाइए, फिर बर्फ़ जैसे ठंडे पानी के साथ बिलोइए जब तक मक्खन ऊपर न तैरे। मक्खन धोकर धीमी आँच पर पकाइए जब तक घी साफ़ और खुरचन सुनहरी-भूरी न हो जाए। फिर छान लीजिए।
1 किलो मलाई से कितना घी निकलता है?
लगभग 400 से 500 ग्राम, पर यह मलाई की गाढ़ाई और दूध पर निर्भर करता है। भैंस की मलाई से ज़्यादा घी निकलता है। टोंड दूध की पतली मलाई से, या जिस मलाई में दूध ज़्यादा रह गया हो, उससे कम।
घी बनाने से पहले मलाई में दही क्यों मिलाते हैं?
दही जमाने से मलाई आसानी से बिलोकर मक्खन बनती है और घी में हल्की खटास वाली भरी-भरी ख़ुशबू आती है। बिना दही के सीधे मलाई गरम करके भी घी बनता है, पर उसकी ख़ुशबू पकी क्रीम जैसी होती है और खुरचन जल्दी जलती है।
कैसे पता चले कि घी बन गया?
चटर-पटर बंद हो जाती है, झाग बैठ जाता है, घी साफ़ सुनहरा दिखता है और नीचे की खुरचन हल्की सुनहरी-भूरी होकर सोंधी ख़ुशबू देती है। तभी गैस बंद कीजिए। खुरचन गहरी भूरी या काली हो जाए तो घी जल गया।
घर का घी खट्टा क्यों हो गया या उसमें फफूँद क्यों लगी?
लगभग हमेशा पानी बचने से। या तो मक्खन पूरा नहीं पका, या छाछ ठीक से नहीं धुली, या गीला चम्मच या गीला जार इस्तेमाल हुआ। चटर-पटर बंद होने तक पकाइए और सब कुछ एकदम सूखा रखिए।
क्या बाज़ार के मक्खन से घी बना सकते हैं?
हाँ। बिना नमक वाला मक्खन धीमी आँच पर तब तक गरम कीजिए जब तक झाग बनकर शांत न हो जाए और खुरचन सुनहरी न हो जाए, 500 ग्राम में लगभग 15 से 20 मिनट। छान लीजिए। लगभग 400 ग्राम हल्के स्वाद वाला घी मिलेगा।




