दही से बना घी या मलाई वाला घी: पहचान कैसे करें, और हम कौन सा बनाते हैं

दही से बना घी दूध या मलाई को दही में जमाकर, मथकर निकले मक्खन को धीमी आँच पर पकाकर बनता है, जबकि क्रीम वाला घी अलग की गई क्रीम या मक्खन से बिना दही के बनता है। हमारा गाय और भैंस का बिलोना घी पूरे दूध के दही से बनता है, और दानेदार घी दही में जमाई मलाई से।
हर घी दूध की वसा से बनता है, पर वह वसा कढ़ाई तक तीन अलग रास्तों से पहुँच सकती है: पूरे दूध के दही से, दही में जमाई गई मलाई से, या सीधे क्रीम से। लोग दही से बना घी और मलाई वाले घी का फ़र्क़ इसलिए ढूँढते हैं क्योंकि लेबल पर यह कम ही लिखा होता है। पिलानी के पास हमारे गाँव में तीन में से दो तरीक़ों से घी बनता है, इसलिए यहाँ तीनों साफ़-साफ़ समझाए हैं, और यह भी कि म्हारा का कौन सा जार किस तरीक़े से बनता है।
घी बनाने के तीन तरीक़े
1. पूरे दूध का दही (बिलोना)
दूध उबाला जाता है, गुनगुना होने पर उसमें थोड़ा पुराना दही डालकर जमा दिया जाता है। पहले कुछ नहीं निकाला जाता, इसलिए दूध की पूरी वसा दही में जाती है। अगली सुबह दही को लकड़ी के बिलोने से मथा जाता है, जब तक सफ़ेद मक्खन ऊपर न आ जाए और बाक़ी छाछ न बन जाए। मक्खन धीमी आँच पर पिघलाया जाता है, नीचे खुरचन बैठ जाती है, और साफ़ घी छान लिया जाता है।
यह सबसे धीमा और सबसे महँगा तरीक़ा है। एक किलो घी के लिए लगभग 25 से 30 लीटर देसी गाय का दूध लगता है, क्योंकि गाय के दूध में वसा कुछ प्रतिशत भर होती है और उसमें से भी कुछ हमेशा छाछ में रह जाती है। पूरा तरीक़ा बिलोना घी क्या है में पढ़ें।
2. मलाई को दही में जमाकर
यह तरीक़ा बहुत से घरों में पहले से चलता है। दूध उबालकर ठंडा करने पर ऊपर मलाई जमती है। वह मलाई रोज़ उतारकर अलग रख ली जाती है। जब काफ़ी हो जाए, उसमें थोड़ा दही मिलाकर जमाया जाता है, फिर मथकर मक्खन निकाला जाता है और बिलोना वाले मक्खन की तरह धीमी आँच पर घी बनाया जाता है।
यह भी दही से बना घी है। जमने की हल्की खटास इसमें भी आती है, धीमी आँच पर यह भी पकता है। पर इसकी शुरुआत पूरे दूध से नहीं, दूध की मलाई से होती है। मलाई के नीचे का दूध पीने, चाय या दही में काम आ जाता है, इसलिए उन सारे लीटर का ख़र्च अकेले घी पर नहीं पड़ता। इसीलिए मलाई वाला घी पूरे दूध के बिलोना घी से सस्ता पड़ता है।
3. क्रीम से सीधा घी (डेयरी का तरीक़ा)
डेयरी में दूध सेपरेटर मशीन से गुज़रता है जो क्रीम अलग कर देती है। क्रीम को या तो सीधे गरम करके घी बना लिया जाता है, या पहले मक्खन बनाकर पिघलाया जाता है। आम तौर पर इसमें दही का क़दम होता ही नहीं। यह असली घी है, FSSAI लाइसेंस के साथ बिकता है, ख़ुशबू साफ़ और हल्की होती है। यही सबसे किफ़ायती तरीक़ा है। बिलोना से इसकी पूरी तुलना बिलोना घी और साधारण घी में है।
म्हारा का कौन सा जार किस तरीक़े से बनता है
यह बात आप हमसे सुनें, अंदाज़ा न लगाएँ।
- देसी गाय बिलोना घी पूरे देसी गाय के दूध से बनता है: रात भर दही जमाकर, लकड़ी के बिलोने से मथकर, धीमी आँच पर पकाकर और छानकर। यह पहला तरीक़ा है।
- देसी भैंस का घी भी इसी तरह पूरे भैंस के दूध से बनता है: पूरे दूध का दही, बिलोना, धीमी आँच। यह भी पहला तरीक़ा है।
- देसी गाय दानेदार घी देसी गाय के दूध की मलाई से बनता है, जिसे दही में जमाकर मथा, धीमी आँच पर पकाया और धीरे ठंडा किया जाता है ताकि दाने बनें। यह दूसरा तरीक़ा है। यह दही से बना है, पर पूरे दूध वाला बिलोना घी नहीं है, और हम इसे कभी बिलोना नहीं कहते।
हमारा कोई जार तीसरे तरीक़े से नहीं बनता। इसलिए नहीं कि डेयरी घी ख़राब है, बल्कि इसलिए कि जिन घरों के साथ हम काम करते हैं वे ऐसे घी नहीं बनाते।
दही वाला घी और क्रीम वाला घी: जार में क्या बदलता है
ख़ुशबू। दूध या मलाई को दही में जमाने से हल्की खटास आती है। मक्खन धीमी आँच पर पकने पर यही खटास गहरी, सोंधी ख़ुशबू बन जाती है। पूरे दूध वाले बिलोना घी में यह सबसे भरी हुई होती है। मलाई-दही वाले घी में भी होती है, पर थोड़ी हल्की और मीठी। सीधे क्रीम से बना घी दूधिया और हल्का महकता है, गरम मक्खन जैसा।
रंग। रंग से तरीक़ा पता नहीं चलता। गाय का घी चारे के बीटा-कैरोटीन से पीला होता है, और बरसात के बाद हरा चारा खाने पर ज़्यादा पीला। भैंस का घी किसी भी तरीक़े से बने, सफ़ेद ही रहता है। गहरा पीला जार गाय का घी है, बिलोना का सबूत नहीं।
बनावट। बनावट से भी नहीं। धीरे ठंडा हुआ हर घी दानेदार जमता है, जल्दी ठंडा हुआ चिकना। हमारा दानेदार घी मलाई की वजह से नहीं, धीरे ठंडा करने की वजह से दानेदार है। इस पर पूरी बात दानेदार घी कैसे बनता है में है।
मलाई घी, मक्खन घी, कल्चर्ड घी: इन शब्दों का मतलब
- मलाई घी आम तौर पर इकट्ठा की गई मलाई से बना घी है। ज़्यादातर घरों में मलाई पहले दही में जमाकर मथी जाती है, यानी दूसरा तरीक़ा। कुछ लोग मलाई को बिना जमाए सीधे गरम कर लेते हैं, जो तीसरे तरीक़े के क़रीब है। लेबल पर न लिखा हो तो पूछ लें।
- मक्खन घी का मतलब बस इतना है कि घी मक्खन पिघलाकर बना। मक्खन पूरे दूध के दही से, मलाई के दही से या ताज़ा क्रीम से, कहीं से भी आ सकता है, इसलिए यह शब्द अकेले कुछ नहीं बताता।
- कल्चर्ड घी विदेश में उस घी को कहते हैं जो मथने से पहले खट्टी की गई क्रीम या मक्खन से बने। एक चम्मच दही डालकर दूध जमाना वही बात है, गाँव के तरीक़े से।
काम का सवाल हमेशा एक ही है: दही में क्या गया, अगर दही था तो? पूरा दूध, मलाई, या कुछ नहीं? जो अपना घी जानता है, वह एक लाइन में जवाब दे देगा। मक्खन और घी के फ़र्क़ पर हमारा लेख घी या मक्खन भी देख सकते हैं।
ख़रीदते समय कैसे पहचानें
बाहर से पक्का पता लगाना ज़्यादातर मुमकिन नहीं। कोई आसान घरेलू जाँच नहीं जो बताए कि वसा दही से होकर आई या नहीं। आप ये कर सकते हैं:
- लेबल या प्रोडक्ट पेज पर तरीक़ा पढ़ें। "पूरे दूध के दही से" या "मलाई से" दोनों साफ़ जवाब हैं। "पारंपरिक" और "प्रीमियम" जवाब नहीं हैं।
- किसी जाने-पहचाने जार के साथ सूँघें। दही वाला घी अक्सर गहरा और हल्का खट्टा-सोंधा महकता है। यह इशारा है, सबूत नहीं।
- दाम देखें। पूरे दूध के बिलोना घी में प्रति किलो 25 से 30 लीटर गाय का दूध लगता है। अगर पूरे दूध वाला बिलोना जार साधारण डेयरी घी के दाम में मिल रहा है, तो पूछना बनता है। हमारा गाय बिलोना 1 लीटर ₹1,999 का है और मलाई वाला दानेदार 1 kg वेबसाइट पर दिया दाम का। दोनों के बीच का फ़र्क़ पहले और दूसरे तरीक़े का फ़र्क़ है।
- बेचने वाले से सीधे पूछें। छोटे स्तर पर घी बनाने वाला ख़ुशी से समझाएगा। जवाब गोलमोल हो, तो लेबल को भी गोलमोल मानें।
आपके लिए कौन सा ठीक है
रोज़ के तड़के, सब्ज़ी और पराँठे के लिए हमारा देसी गाय दानेदार घी जैसा मलाई-दही वाला घी रोज़ के दाम में दही वाली ख़ुशबू देता है, और ज़्यादा पकाने वाले घरों के लिए बड़े पैक में भी आता है। गरम रोटी, दाल या खिचड़ी पर ऊपर से डालने के लिए, जहाँ घी का स्वाद अलग से आता है, पूरे दूध वाला गाय का बिलोना घी अपना फ़र्क़ दिखाता है। लड्डू, हलवे और चूरमे के लिए हमारे यहाँ कई घर भैंस का बिलोना घी पसंद करते हैं।
और अगर आप तलने और त्योहारों के लिए डेयरी घी लेते हैं, तो वह भी समझदारी है। बस इतनी गुज़ारिश है कि हर जार, हमारा भी, साफ़ बताए कि वह किस रास्ते से बना।
लोग ये भी पूछते हैं
दही से बने घी और क्रीम वाले घी में क्या फ़र्क़ है?
दही वाला घी दही मथकर निकले मक्खन से बनता है, यानी वसा पहले जमने-खट्टी होने के क़दम से गुज़रती है। क्रीम वाला घी ताज़ा क्रीम या उसके मक्खन से बिना दही के बनता है। दही वाला घी अक्सर गहरा और हल्का खट्टा-सोंधा महकता है, क्रीम वाला हल्का।
क्या मलाई वाला घी और बिलोना घी एक ही है?
नहीं। पारंपरिक बिलोना घी पूरे दूध के दही से बनता है। मलाई वाला घी उबले दूध पर जमी मलाई से शुरू होता है। मलाई को दही में जमाकर मथा जाए तो वह दही से बना घी है, पर फिर भी पूरे दूध वाला बिलोना घी नहीं।
क्या म्हारा का दानेदार घी बिलोना घी है?
नहीं, और हम इसे बिलोना कहकर नहीं बेचते। हमारा दानेदार घी देसी गाय के दूध की मलाई को दही में जमाकर, मथकर और धीमी आँच पर पकाकर बनता है। पूरे दूध के दही से हमारा गाय बिलोना और भैंस का घी बनता है।
क्या घर पर जाँच सकते हैं कि घी दही से बना है?
पक्के तौर पर नहीं। दही वाला घी अक्सर गहरा और हल्का खट्टा महकता है, पर रंग और बनावट से तरीक़ा पता नहीं चलता। बनाने वाले का साफ़ बताया तरीक़ा ही सबसे काम की चीज़ है।
कल्चर्ड घी क्या होता है?
कल्चर्ड घी उस क्रीम या मक्खन से बनता है जिसे मथने से पहले कल्चर डालकर खट्टा किया गया हो। यह वही बात है जो गाँव में एक चम्मच पुराना दही डालकर दूध या मलाई जमाने से होती है।
दही वाला घी क्रीम वाले घी से महँगा क्यों है?
दही मथने पर कुछ वसा छाछ में रह जाती है, और जमाने-मथने में समय और मेहनत लगती है। पूरे दूध के बिलोना घी में प्रति किलो लगभग 25 से 30 लीटर गाय का दूध लगता है, जो मशीन से निकाली क्रीम से कहीं महँगा पड़ता है।




