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हमारा गाँव

घर का घी, घर जैसा भरोसा

हर जार का एक घर है।

शेखावाटी, राजस्थान — जहाँ घी आज भी बनाया जाता है, फ़ैक्ट्री में नहीं बनता।

हर जार का एक घर है
गाँव की रसोई की मेज़ पर म्हारा के जार
एक ही जगह से

शेखावाटी के घरों से, जहाँ घी आज भी बनाया जाता है, फ़ैक्ट्री में नहीं बनता।

म्हारा किसी फ़ैक्ट्री से नहीं आता। यह पिलानी, झुंझुनू के पास हमारे गाँव के घरों से आता है, जहाँ वही परिवार पीढ़ियों से देसी गाय-भैंस पालते आए हैं। हर सुबह दूध उन्हीं रसोइयों में उबलता और दही बनता है जहाँ हमेशा से बनता आया; हर हफ़्ते दही मथी जाती है, मक्खन धीमी आँच पर पकता है, और घी घर-घर से इकट्ठा होता है।

हम हर घर को नाम से जानते हैं। हम हर बैच चखते हैं और तभी अपने नाम से सील करते हैं। "पते वाला घी" का हमारे लिए यही मतलब है — आप अपने जार को उस गाँव, उस हफ़्ते और उन घरों तक पीछे खोज सकते हैं जिन्होंने इसे बनाया।

"यहाँ घी फ़ैक्ट्री में नहीं बनता — घर में बनता है। और जो घर में बनता है, वही आपके घर पहुँचता है।"
1 गाँवएक ही जगह से
हर हफ़्तेछोटे बैच
नाम सेजाने-पहचाने घर
बछड़े के साथ देसी गाय, खेत और गाँव का घर — रेखाचित्र
कुकीज़ के बारे में एक छोटी बातहम Google Analytics से समझते हैं कि लोगों को कौन-सा घी पसंद है, और Meta Pixel से साइट पर आए लोगों को Facebook, Instagram और WhatsApp पर हमारा घी दिखाते हैं। आपका नाम, फ़ोन और पता कभी साझा नहीं होता, कुछ बेचा नहीं जाता। प्राइवेसी पॉलिसी