घी की खुरचन: फेंकिए मत, हमारी रसोई के 7 इस्तेमाल

घी की खुरचन के सबसे अच्छे इस्तेमाल सबसे सीधे हैं: सुनहरी-भूरी खुरचन में चीनी मिलाकर खाइए, पराठे के आटे में गूँधिए, दाल या कढ़ी में डालिए, या झटपट बर्फ़ी बना लीजिए। यह असल में दूध का भुना हुआ ठोस हिस्सा है, इसलिए इसे फ़्रिज में रखिए और चार-पाँच दिन में ख़त्म कर दीजिए।
घी छनकर जब जार ठंडा होने रख दिया जाता है, तब हमारी रसोई में कढ़ाई तक पहले पहुँचने की होड़ लगती है। कढ़ाई के तले में भुरभुरी सुनहरी-भूरी परत जमी होती है, अब भी गरम, भुने दूध की ख़ुशबू वाली। जो पहले पहुँचे, वह स्टील की चम्मच से उसे खुरचकर निकालता है और ऊपर थोड़ा बूरा बुरक देता है, और घर के बच्चे पहले से हाथ फैलाए खड़े होते हैं। यही है घी की खुरचन, और इसके इतने अच्छे इस्तेमाल हैं जितने ज़्यादातर लोग सोचते भी नहीं। नीचे वे सात तरीक़े हैं जो हमारी रसोई में बार-बार काम आते हैं।
घी की खुरचन क्या होती है?
जब मक्खन या मलाई को पकाकर घी बनाते हैं, तो पानी उड़ जाता है और दूध के ठोस हिस्से, ज़्यादातर प्रोटीन और थोड़ी दूध की शक्कर, घी से अलग हो जाते हैं। ये नीचे बैठ जाते हैं और गरम घी में धीरे-धीरे भुनकर सफ़ेद से सुनहरे-भूरे हो जाते हैं। यही खुरचन है। इसमें अब भी अच्छा-ख़ासा घी समाया रहता है, इसीलिए इसका स्वाद इतना भरा-भरा होता है।
हर घर में इसका अलग नाम है। कढ़ाई खुरचकर निकलती है, इसलिए खुरचन। कुछ गाँवों में किट्ट कहते हैं। कहीं घी की तली। अंग्रेज़ी रेसिपी में इसे घी रेज़िड्यू या ब्राउन बटर सॉलिड्स लिखा मिलेगा। चीज़ एक ही है।
अच्छी खुरचन और जली खुरचन: कब फेंक दें
- सुनहरी से मध्यम भूरी, सोंधी ख़ुशबू, हल्की मीठी: एकदम बढ़िया। इस्तेमाल कीजिए।
- गहरी भूरी, किनारों पर हल्की कड़वी: दाल या पराठे जैसी नमकीन चीज़ों में अब भी चल जाती है, जहाँ मसाले उसे ढक लेते हैं।
- काली, धुएँ वाली या कड़वी: फेंक दीजिए। जली खुरचन का स्वाद तीखा होता है, किसी भी चीज़ में मिलाइए, छिपेगा नहीं। घी भी चखकर देखिए, क्योंकि खुरचन जली है तो घी में भी जली गंध आ सकती है।
अच्छी खुरचन कढ़ाई में ही बनती है। जब नीचे के दाने सुनहरे-भूरे हों, तभी गैस बंद कर दीजिए। वह सही पल हमारे पूरे तरीक़े वाले लेख घर पर घी कैसे बनाएं में है।
घी की खुरचन के 7 इस्तेमाल, जो हमारी रसोई में होते हैं
1. चीनी के साथ, गाँव के बच्चों की मिठाई
गरम खुरचन, एक चम्मच बूरा या पिसी चीनी, उँगली से मिला दीजिए। बस इतना ही। स्वाद भुने दूध की देसी मिठाई जैसा, कुछ मावे और कुछ कैरामल के बीच का। कुछ घरों में चीनी की जगह कूटा हुआ गुड़ डालते हैं। यह खुरचन का सबसे पुराना इस्तेमाल है, और सर्दियों में कटोरी घंटे भर भी नहीं टिकती।
2. पराठे और रोटी के आटे में
चार-पाँच पराठों के आटे में दो-तीन बड़े चम्मच खुरचन मसलकर मिलाइए और हमेशा की तरह गूँध लीजिए। पराठे नरम और परतदार बनते हैं, और उनसे घी की ख़ुशबू आती है। बाजरे के आटे में भी यह अच्छा चलता है, और मिस्सी रोटी के आटे में थोड़ी सी खुरचन तो कमाल करती है। नमकीन चाहिए तो नमक और अजवाइन डाल लीजिए।
3. आटे के साथ खुरचन की बर्फ़ी या लड्डू
त्योहार वाला इस्तेमाल यही है। आधी कटोरी गेहूँ का आटा एक चम्मच घी में तब तक भूनिए जब तक सोंधी ख़ुशबू न आए। गैस बंद कीजिए, फिर एक कटोरी खुरचन, एक तिहाई कटोरी बूरा और चुटकी भर इलायची डालिए। चखकर देख लीजिए, चाहें तो चीनी और डालिए, और गरम-गरम ही अच्छी तरह मिला दीजिए। घी लगी थाली में दबाकर जमने दीजिए और बर्फ़ी काट लीजिए, या हथेलियों से छोटे लड्डू बाँध लीजिए। स्वाद कुछ-कुछ घर के बने मिल्क केक जैसा आता है। यह पसंद आए तो हमारी चूरमा रेसिपी भी देखिए, वह भी घी में भुने आटे पर ही टिकी है।
4. दाल के तड़के और कढ़ी में
दाल उबलते समय उसमें एक चम्मच खुरचन डाल दीजिए, या आख़िर में तड़के में मिला दीजिए। दाल में गहरा, हल्का मीठा भुना स्वाद आ जाता है। राजस्थानी कढ़ी में परोसने से ठीक पहले थोड़ी खुरचन मिला दें, तो तड़के में ज़्यादा घी डाले बिना कढ़ी भरी-भरी लगती है।
5. गरम चावल या खिचड़ी पर
गरम दाल-चावल पर एक छोटी चम्मच खुरचन, या मूँग दाल की खिचड़ी पर बुरकी हुई, छोटा सा सुख है। जो बच्चे सादी खिचड़ी नहीं खाते, वे अक्सर ऐसे खा लेते हैं।
6. केक, बिस्कुट और नानख़टाई में
खुरचन काफ़ी हद तक ब्राउन बटर जैसा काम करती है। केक, कुकी या नानख़टाई की रेसिपी में कुछ बड़े चम्मच मक्खन या घी की जगह खुरचन डालिए, बेक की हुई चीज़ में टॉफ़ी जैसा, भुने दूध वाला स्वाद आ जाता है। मात्रा कम रखिए, क्योंकि इससे नमी और दूध के ठोस हिस्से बढ़ते हैं।
7. हलवे, खीर या शीरे पर
सूजी के हलवे, आटे के शीरे या खीर पर परोसने से ठीक पहले एक चम्मच खुरचन बुरक दीजिए। बिना किसी मेहनत के थोड़ा कुरकुरापन और मावे जैसा स्वाद आ जाता है।
घी के जार में खुरचन क्यों नहीं होती
घी ख़रीदते हैं तो उसके साथ खुरचन नहीं आती। जार में भरने से पहले घी छान लिया जाता है, और अच्छे घी में ये ठोस हिस्से नहीं होने चाहिए। कई लोग दानेदार घी के दानों को खुरचन समझ लेते हैं। ऐसा नहीं है। वे दाने ख़ुद घी ही हैं, जो धीरे-धीरे ठंडा होते हुए दानों में जम जाता है, और ये गरम रोटी छूते ही पिघल जाते हैं। यह बात हमने दानेदार घी में समझाई है।
घर के बने जार में सबसे नीचे दिखने वाले कुछ काले कण खुरचन के वे टुकड़े हैं जो छलनी से निकल गए। इनसे कोई नुक़सान नहीं, बस घी की उम्र थोड़ी घट सकती है। इसलिए अगर खुरचन का शौक़ है, तो उसका एक ही रास्ता है: कभी-कभी घर पर घी बनाइए। बीच के दिनों में रोज़ के खाने के लिए एक अच्छा जार काम चला देता है।
घी की खुरचन कितने दिन चलती है, और कैसे रखें
घी महीनों चलता है क्योंकि उसमें लगभग पानी नहीं होता। खुरचन अलग है। यह दूध का ठोस हिस्सा है जिसमें अब भी कुछ नमी रहती है, और इसी से यह जल्दी ख़राब होती है। साफ़, हवा-बंद डिब्बे में फ़्रिज में रखिए और चार-पाँच दिन में ख़त्म कर दीजिए। खट्टी या पनीर जैसी गंध आए, या ज़रा भी फफूँद दिखे, तो फेंक दीजिए। इस्तेमाल से पहले एक मिनट कढ़ाई में गरम कर लीजिए, फिर से नरम हो जाती है।
अगर खुरचन में बहुत घी लगा रह गया हो, तो गरम रहते छलनी में दबाकर कुछ घी वापस निकाल लीजिए, फिर बची खुरचन रख दीजिए। दबाकर निकला घी बाक़ी जार की तरह ही चलता है, इसकी बातें घी को कैसे स्टोर करें में हैं।
क्या घी की खुरचन सेहत के लिए अच्छी है?
खुरचन भारी चीज़ है: दूध का प्रोटीन, थोड़ी दूध की शक्कर, और ऊपर से उसमें समाया घी। इसलिए यह स्वादिष्ट है, पेट भरती है, और भारी भी है। इसे मिठाई की तरह खाइए, सेहत की चीज़ मानकर नहीं, और एक व्यंजन में एक-दो चम्मच काफ़ी है। दूध का प्रोटीन और शक्कर खुरचन में ही जाकर बचते हैं, इसलिए जिन्हें दूध ठीक से नहीं पचता, उन्हें यह घी से ज़्यादा भारी लग सकती है।
ऐसे, एक-एक चम्मच करके खाई जाए, तो घी की खुरचन घर पर घी बनाने का एक छोटा सा इनाम है। हमारे गाँव में इसे फेंकने की कोई सोच भी नहीं सकता, और एक बार गरम खुरचन थोड़े बूरे के साथ खा ली, तो आप भी नहीं फेंकेंगे।
लोग ये भी पूछते हैं
घी बनाने के बाद बची चीज़ को क्या कहते हैं?
ज़्यादातर घरों में इसे खुरचन कहते हैं, क्योंकि यह कढ़ाई खुरचकर निकलती है। कुछ गाँवों में किट्ट और कहीं घी की तली कहते हैं। अंग्रेज़ी में इसे घी रेज़िड्यू या ब्राउन बटर सॉलिड्स कहते हैं। यह घी बनाने के बाद बचा, दूध का भुना हुआ ठोस हिस्सा है।
क्या घी की खुरचन खा सकते हैं?
हाँ, अगर वह सुनहरी से मध्यम भूरी हो और सोंधी ख़ुशबू दे। घरों में इसे चीनी के साथ, पराठे, दाल, बर्फ़ी और हलवे में खाते हैं। खुरचन काली, धुएँ वाली या कड़वी हो तो वह जल चुकी है, उसे फेंक दीजिए।
घी की खुरचन कितने दिन रख सकते हैं?
खुरचन को साफ़, हवा-बंद डिब्बे में फ़्रिज में रखिए और चार-पाँच दिन में इस्तेमाल कर लीजिए। घी के उलट इसमें अब भी कुछ नमी होती है, इसलिए यह जल्दी ख़राब होती है। खट्टी गंध आए या फफूँद दिखे तो फेंक दीजिए।
खुरचन की बर्फ़ी कैसे बनाते हैं?
आधी कटोरी आटा एक चम्मच घी में सोंधा होने तक भूनिए। गैस बंद करके एक कटोरी खुरचन, लगभग एक तिहाई कटोरी बूरा और चुटकी भर इलायची मिलाइए। घी लगी थाली में दबाइए, जमने दीजिए और टुकड़े काट लीजिए।
घी की खुरचन काली और कड़वी क्यों हो गई?
घी बहुत तेज़ आँच पर या बहुत देर तक पका, इसलिए दूध के ठोस हिस्से जल गए। अगली बार धीमी आँच पर पकाइए और खुरचन सुनहरी-भूरी होते ही गैस बंद कर दीजिए। गरम घी उसके बाद भी एक मिनट उसे पकाता रहता है।
क्या दानेदार घी के दाने खुरचन होते हैं?
नहीं। दानेदार घी के दाने ख़ुद घी ही हैं, जो धीरे-धीरे ठंडा होते समय दानों में जम जाता है। किसी गरम चीज़ को छूते ही ये पिघल जाते हैं। खुरचन तो जार में भरने से पहले ही छानकर अलग कर दी जाती है।




