एक सुबह, दस कदम, एक जार।
यही होता है हर हफ़्ते, हर उस घर में जहाँ से म्हारा आता है। कोई फ़ैक्ट्री नहीं, कोई शॉर्टकट नहीं।

दूध
गाँव के घरों की देसी गायें, भोर में दुही।

उबालना
चूल्हे पर उबला दूध, अपने आप ठंडा।

जामन
कल की दही का एक चम्मच — यहीं से जामन शुरू।

दही
रात भर में गाढ़ी दही जमी।

बिलोना
लकड़ी के बिलोने से तब तक मथा जब तक मक्खन ऊपर न आ जाए।

मक्खन
छाछ में से ताज़ा मक्खन निकाला।

धोना
साफ़ पानी में धोया, और कुछ नहीं।

पिघलाना
धीमी आँच पर धीरे-धीरे पिघलाया।

घी
तब तक पकाया जब तक साफ़, दानेदार और सुनहरा न हो जाए।

म्हारा जार
छानकर, शुद्धता के लिए सील।








