देसी घी वाला राजस्थानी चूरमा, पूरी चूरमा रेसिपी

चूरमा मोटे गेहूँ के आटे में भरपूर घी का मोयन डालकर सख़्त आटा गूँधने, हाथ से दबाए मुठिया कुरकुरे सेकने, उन्हें दरदरा पीसने और फिर गरम घी, चीनी या गुड़, इलायची और मेवे मिलाने से बनता है। थोड़ा और घी डालकर बाँध दें तो चूरमा के लड्डू बन जाते हैं।
हमारे गाँव में जब घर में मेहमान आते हैं, पूजा होती है, शादी होती है या बस सर्दी का कोई इतवार होता है, तो चूल्हे पर घी की कड़ाही चढ़ती है और पूरा घर समझ जाता है कि दाल बाटी चूरमा बनने वाला है। यह चूरमा रेसिपी घर वाला सीधा तरीक़ा है: मोटे गेहूँ का आटा घी के मोयन के साथ, हाथ से बने मुठिया, कुरकुरे होने तक सिके, फिर कूटकर और घी, चीनी या गुड़, इलायची और मेवे के साथ मिलाए हुए।
यह मुश्किल नहीं है, बस धीरे-धीरे बनने वाली चीज़ है। ज़्यादातर मेहनत छोटी बातों में है: आटा कितना मोटा है, मोयन कितना है, मुठिया कितनी देर सिकते हैं और उन्हें कैसे पीसते हैं। नीचे हर बात कारण के साथ है, सही मात्रा रेसिपी कार्ड में है।
राजस्थानी रसोई में चूरमा
चूरमा घर में पहले से मौजूद चीज़ों से बनता था: गेहूँ, घी और कुछ मीठा। आज भी कई घरों में सबसे जल्दी वाला चूरमा सुबह की बची रोटियों से बनता है, गरम घी और गुड़ के साथ हाथ से मसलकर। सर्दी में कुछ परिवार गेहूँ की जगह बाजरे का चूरमा बनाते हैं। त्योहार वाला चूरमा, जो दाल बाटी के साथ परोसा जाता है, ख़ास इसी के लिए गूँधे आटे से बनता है, और यहाँ हम वही बना रहे हैं।
अच्छा चूरमा खिला-खिला और भुरभुरा होता है, लेप जैसा नहीं। हर दाने पर घी चढ़ा हो, ताकि मुँह में नरम लगे पर हल्का सा दाना भी महसूस हो। स्वाद पहले भुने गेहूँ का आए, मीठा बाद में।
आटा और मोयन
मोटा या दरदरा गेहूँ का आटा लें। ज़्यादातर चक्की वाले कहने पर मोटा पीस देते हैं। रोटी वाला बारीक आटा भी चलता है, पर चूरमा नरम होकर हलवे जैसा बनता है। बारीक आटा ही हो तो उसमें दो बड़े चम्मच सूजी मिला लें।
मोयन वह घी है जो पानी डालने से पहले सूखे आटे में मसला जाता है। चूरमे के लिए मोयन भरपूर चाहिए। उँगलियों से तब तक मसलें जब तक आटा ब्रेड के चूरे जैसा न दिखे, फिर मुट्ठी भर आटा दबाकर देखें। आकार बना रहे तो मोयन पूरा है, बिखर जाए तो थोड़ा घी और डालें।
मोयन आटे पर परत चढ़ा देता है, जिससे आटा रबड़ जैसा नहीं होता। मुठिया बाहर से कुरकुरे और अंदर से खस्ता बनते हैं, और इसीलिए बाद में दानों में टूटते हैं। मोयन कम हो तो मुठिया पत्थर जैसे सख़्त होते हैं और पिसकर सूखा पाउडर बन जाते हैं।
आटा गूँधना और मुठिया बनाना
गुनगुना दूध, या आधा दूध आधा पानी, थोड़ा-थोड़ा डालकर सख़्त आटा गूँधें। रोटी के आटे से ज़्यादा सख़्त, लगभग मठरी के आटे जैसा। नरम आटा तलते समय ज़्यादा घी पीता है और बीच से कच्चा रहता है।
आटे के आठ-दस हिस्से करें। हर हिस्से को मुट्ठी में लेकर कसकर दबाएँ, ताकि उँगलियों के निशान वाला एक लंबा टुकड़ा बने। यही मुठिया हैं। उँगलियों के निशान सजावट नहीं हैं, इनसे आँच ज़्यादा जगह तक पहुँचती है और मुठिया अंदर तक बराबर सिकते हैं।
तलें, बेक करें या आग में सेकें
गाँव में मुठिया और बाटी पारंपरिक रूप से कंडों की आग की गरम राख में दबाकर सेके जाते हैं और उन पर धुएँ वाली परत आती है। शहर की रसोई में दो आसान तरीक़े हैं।
- तलना। कड़ाही में घी मध्यम गरम करें। मुठिया डालें और धीमी से मध्यम आँच पर पंद्रह से अठारह मिनट पलटते हुए तलें, जब तक चारों तरफ़ से गहरे सुनहरे न हो जाएँ। घी यह आँच आराम से झेलता है, इस पर हमारा लेख है घी का स्मोक पॉइंट। घी बहुत गरम हुआ तो मुठिया बाहर से भूरे और अंदर से कच्चे रहेंगे।
- बेक करना। 200 °C पर पच्चीस से तीस मिनट बेक करें, बीच में एक बार पलटें, जब तक सख़्त और हल्के भूरे न हो जाएँ। बेक करने में सेकते समय घी कम लगता है, पर आख़िर में घी उतना ही डालना है।
जाँचने के लिए एक मुठिया तोड़कर देखें। अंदर सूखा और पका हो, गीला आटा न दिखे।

पीसना, घी और मिठास
मुठिया के टुकड़े करें और मिक्सी में रुक-रुक कर चलाएँ। जब सूजी जैसा दरदरा चूरा बन जाए, रुक जाएँ। मिक्सी देर तक चलाई तो आटे का गरम घी सब कुछ लेप बना देता है। छलनी से छानें और छलनी में बचे बड़े टुकड़े एक बार फिर पीस लें। हमारे गाँव की बड़ी-बूढ़ी औरतें आज भी इन्हें पत्थर की कूंडी में या हथेलियों से मसलकर चूरा करती हैं, और उससे अच्छा दाना कहीं नहीं मिलता।
अब घी डालने की बारी है। गुनगुने चूरमे पर गरम पिघला घी डालें और हाथों से अच्छी तरह मसलें। स्वाद यहीं से आता है, इसलिए सबसे अच्छा घी यहीं लगाइए। शेखावाटी के कई घरों में चूरमे के लिए भैंस का घी लगता है। यह गाढ़ा और मलाईदार होता है, हर दाने पर चढ़ता है और इसका हल्का स्वाद भुने गेहूँ को दबाता नहीं। गाय के बिलोना घी से सोंधी ख़ुशबू ज़्यादा आती है और चूरमा ज़्यादा सुनहरा बनता है, कई परिवारों को यही पसंद है। दोनों की तुलना गाय या भैंस का घी में है।
मिठास के तीन तरीक़े हैं:
- बूरा या पिसी चीनी। सबसे आम। चूरमा हल्का गुनगुना रह जाए तब मिलाएँ, वरना चीनी पिघलकर गाँठें बना देती है।
- गुड़। गुड़ कद्दूकस करें, एक-दो चम्मच घी के साथ धीमी आँच पर बस पिघलने तक गरम करें और चूरमे पर डाल दें। चाशनी न बनाएँ, वरना चूरमा सख़्त जम जाएगा। गुड़ वाला चूरमा गहरे रंग का और सोंधी मिठास वाला होता है।
- आधा-आधा। कुछ घरों में स्वाद के लिए थोड़ा गुड़ और बाक़ी चीनी डालते हैं।
आख़िर में इलायची पाउडर और कटे बादाम-काजू मिलाएँ। कुछ परिवारों में एक चम्मच खसखस भी डाली जाती है।
चूरमा के लड्डू
चूरमा के लड्डू इसी चूरमे में थोड़ा और घी डालकर बनते हैं। दो-तीन बड़े चम्मच गरम घी डालें, ज़रूरत हो तो और, जब तक मुट्ठी में दबाने पर चूरमा बँध न जाए। मिश्रण हल्का गुनगुना रहते ही लड्डू बाँध लें। पूरा ठंडा होने पर घी जम जाता है और लड्डू बँधने की जगह चटकने लगते हैं।
शादी में परोसने और रिश्तेदारों को भेजने में लड्डू आसान रहते हैं, और खुले चूरमे से थोड़ा ज़्यादा दिन चलते हैं क्योंकि हवा कम लगती है।
दाल बाटी चूरमा परोसना
पूरी थाली है दाल बाटी चूरमा: घी और हींग के तड़के वाली गाढ़ी पंचमेल या मिली-जुली दाल, बीच से तोड़कर पिघले घी में डुबोई बाटियाँ, और साथ में चूरमे का ढेर। कई लोग थोड़ा चूरमा दाल-बाटी में मिलाकर खाते हैं। यह ग़लत नहीं है, यहाँ ऐसे ही खाया जाता है।
यह भारी, त्योहार वाला खाना है और एक बार में काफ़ी घी लगता है। अगर आप दिन भर के घी का हिसाब रखते हैं तो हमारा लेख रोज़ कितना घी खाना चाहिए पढ़ें। दिवाली की मिठाइयाँ बना रहे हैं तो हमारी बेसन चक्की में भी घी में धीमी भुनाई का यही तरीक़ा है और वह चूरमे के साथ अच्छी लगती है।
चूरमा रेसिपी में किन ग़लतियों से बचें, और यह कितने दिन चलता है
- बारीक आटा और कम मोयन: सख़्त मुठिया और सूखा, पाउडर जैसा चूरमा।
- नरम आटा: घी पिए हुए, अंदर से कच्चे मुठिया।
- तेज़ आँच पर तलना: बाहर भूरा, अंदर कच्चा।
- ज़्यादा देर या गरम पीसना: दानों की जगह लेप।
- गरम चूरमे में चीनी: गाँठें और चिपचिपापन।
चूरमा स्टील या काँच के बंद डिब्बे में कमरे के तापमान पर चार-पाँच दिन चलता है, सर्दी में कुछ ज़्यादा। लड्डू लगभग एक हफ़्ता चलते हैं। डिब्बा बंद करने से पहले चूरमा पूरा ठंडा होने दें ताकि अंदर भाप न रुके। अगर चूरमा अक्सर बनता है तो घी उतने बड़े जार में लें जो कुछ महीनों में ख़त्म हो जाए, और इस्तेमाल के बीच जार बंद रखें। पूरी जानकारी घी को कैसे स्टोर करें में है।
रेसिपी कार्ड
सामग्री
- 2 कप (300 ग्राम) मोटा या दरदरा गेहूँ का आटा
- 2 बड़े चम्मच सूजी (वैकल्पिक, आटा बारीक हो तो)
- मोयन के लिए एक-तिहाई कप (लगभग 65 ग्राम) घी
- लगभग आधा कप (120 मि.ली.) गुनगुना दूध, या आधा दूध आधा पानी
- तलने के लिए घी (या मुठिया बेक कर लें)
- मिलाने के लिए आधा कप (लगभग 100 ग्राम) भैंस का घी या गाय का बिलोना घी, पिघला हुआ
- पौना कप (150 ग्राम) बूरा या पिसी चीनी, या 150 ग्राम कद्दूकस किया गुड़
- आधा छोटा चम्मच हरी इलायची पाउडर
- 2 बड़े चम्मच कटे बादाम
- 2 बड़े चम्मच कटे काजू
- 1 छोटा चम्मच खसखस (वैकल्पिक)
- लड्डू बनाने हों तो 2–3 बड़े चम्मच घी और
विधि
- आटा और सूजी मिलाएँ। मोयन का घी डालकर उँगलियों से तब तक मसलें जब तक मुट्ठी में दबाने पर आटा आकार में न रहे।
- गुनगुना दूध थोड़ा-थोड़ा डालकर रोटी के आटे से ज़्यादा सख़्त आटा गूँधें। 10 मिनट ढककर रखें।
- आठ-दस हिस्से करें। हर हिस्से को मुट्ठी में दबाकर उँगलियों के निशान वाले मुठिया बनाएँ।
- मध्यम गरम घी में धीमी से मध्यम आँच पर 15–18 मिनट पलटते हुए तलें, जब तक गहरे सुनहरे और अंदर तक पक न जाएँ। या 200 °C पर 25–30 मिनट बेक करें, एक बार पलटें।
- लगभग 10 मिनट ठंडा होने दें, गुनगुने रहते टुकड़े कर लें।
- मिक्सी में रुक-रुक कर सूजी जैसा दरदरा पीसें। छानें और बड़े टुकड़े फिर से पीस लें।
- गुनगुने चूरमे पर पिघला घी डालें और हाथों से अच्छी तरह मसलें।
- चूरमा हल्का गुनगुना रह जाए तब बूरा या चीनी मिलाएँ। गुड़ हो तो 1–2 बड़े चम्मच घी के साथ धीमी आँच पर बस पिघलाकर मिलाएँ।
- इलायची, बादाम, काजू और खसखस मिलाएँ। दाल और बाटी के साथ परोसें।
- लड्डू के लिए 2–3 बड़े चम्मच गरम घी डालें, जब तक मुट्ठी में बँधने न लगे, और गुनगुना रहते ही लड्डू बाँध लें।
लोग ये भी पूछते हैं
मेरा चूरमा सख़्त और सूखा क्यों बना?
ज़्यादातर आटे में मोयन कम था या आटा बहुत बारीक था। मोयन इतना हो कि मुट्ठी में दबाने पर आटा आकार में रहे, और तैयार चूरमे में गरम घी अच्छी तरह मसलना ज़रूरी है।
क्या चूरमा बिना तले बन सकता है?
हाँ। मुठिया को 200 °C पर 25–30 मिनट बेक करें, बीच में एक बार पलटें, जब तक सख़्त और हल्के भूरे न हो जाएँ। बाक़ी तरीक़ा वही है, आख़िर में घी भी उतना ही डालना है।
चूरमे में चीनी डालें या गुड़?
दोनों पारंपरिक हैं। बूरे या पिसी चीनी से चूरमा हल्के रंग का बनता है, गुड़ से गहरे रंग का और सोंधी मिठास वाला। गुड़ को थोड़े घी के साथ बस पिघलने तक गरम करें, चाशनी न बनाएँ।
चूरमा के लड्डू कैसे बनाएँ?
चूरमे में दो-तीन बड़े चम्मच गरम घी डालें, जब तक मुट्ठी में दबाने पर बँधने न लगे। मिश्रण हल्का गुनगुना रहते ही लड्डू बाँधें, ठंडा होने पर घी जम जाता है और लड्डू चटकते हैं।
चूरमे के लिए कौन सा घी अच्छा है?
राजस्थान के कई घरों में चूरमे के लिए भैंस का घी लगता है, क्योंकि वह गाढ़ा होता है और हर दाने पर चढ़ता है। गाय के बिलोना घी से ख़ुशबू ज़्यादा और रंग सुनहरा आता है। दोनों से अच्छा चूरमा बनता है।
चूरमा कितने दिन ताज़ा रहता है?
खुला चूरमा बंद डिब्बे में कमरे के तापमान पर चार-पाँच दिन चलता है, सर्दी में थोड़ा ज़्यादा। लड्डू लगभग एक हफ़्ता चलते हैं। डिब्बा बंद करने से पहले पूरा ठंडा होने दें।




