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रेसिपी

दिवाली की मिठाई: देसी घी वाली 7 मिठाइयाँ जो हम हर साल बनाते हैं

म्हारा की रसोई से, शेखावाटी · 8 मिनट ·
पीतल की थालियों में दिवाली की मिठाई: बेसन के लड्डू, मोहनथाल, मूंग दाल हलवा और भैंस का घी

दिवाली की मिठाई में हमारी शेखावाटी रसोई हर साल ये सात चीज़ें बनाती है: बेसन के लड्डू, मोहनथाल, मूंग दाल का हलवा, चूरमा के लड्डू, गोंद के लड्डू, आटे के लड्डू और घेवर। गाढ़ी, भारी मिठाई में हम भैंस का घी लेते हैं, और जहाँ ख़ुशबू चाहिए वहाँ गाय का बिलोना घी। लड्डू पहले बनाइए, वे हफ़्तों चलते हैं।

दिवाली से लगभग दस दिन पहले हमारी रसोई की ख़ुशबू बदलने लगती है। पहले घी में भुनते बेसन की महक, जो गली तक जाती है और पड़ोसियों को बता देती है कि क्या बन रहा है। फिर गरम घी में फूलता गोंद, फिर धीरे-धीरे पीली से भूरी होती मूंग की दाल। धनतेरस तक ऊपर वाली अलमारी में स्टील के डिब्बे सज जाते हैं और ज़मीन पर मोहनथाल की थाली कपड़े से ढकी रखी होती है।

यहाँ दिवाली की मिठाई की वे रेसिपी हैं जो हम सच में बनाते हैं, पचास की लंबी सूची नहीं। सात मिठाइयाँ, और हर एक के साथ यह कि वह क्या है, हम कौन सा घी लेते हैं, मोटे तौर पर कितना, एक काम की बात जो मिठाई बिगड़ने से बचाती है, और जहाँ हमारी पूरी रेसिपी है उसका लिंक। आख़िर में बनाने का एक सीधा क्रम है, क्योंकि कुछ मिठाइयाँ तीन हफ़्ते चलती हैं और कुछ तीन दिन।

दिवाली की मिठाई के लिए कौन सा घी सबसे अच्छा है?

सूची से पहले घी की बात, क्योंकि घी से मिठाई में जितना फ़र्क़ पड़ता है उतना लोग सोचते नहीं।

  • भैंस का घी हल्का सफ़ेद, गाढ़ा और मलाईदार होता है। भैंस के दूध की चिकनाई कमरे के तापमान पर ज़्यादा सख़्त जमती है, इसलिए इससे बने लड्डू और बर्फ़ी आकार में रहते हैं और रंग साफ़ हल्का रहता है। हमारे इलाक़े के ज़्यादातर घर मिठाई में यही लगाते हैं।
  • गाय का बिलोना घी सुनहरा होता है और इसकी ख़ुशबू गहरी सोंधी होती है। जहाँ ख़ुशबू आगे आनी चाहिए वहाँ यह लगाइए: बेसन के लड्डू, आटे के लड्डू, या हलवे पर आख़िरी चम्मच।
  • आधा-आधा भी चलता है। शेखावाटी के कई घर भैंस के घी में भूनते हैं और ऊपर से एक चम्मच गाय का घी डालते हैं।

दिवाली की मिठाई में घी का असली नियम सीधा है: घी बहुत कम मत कीजिए। इन ज़्यादातर मिठाइयों में घी ही आटे को भूनता है, इलायची की ख़ुशबू फैलाता है और मिठाई को कई दिन नरम रखता है। घी कम हो तो आटा बराबर नहीं भुनता, स्वाद कच्चा लगता है और तीसरे दिन तक मिठाई सख़्त हो जाती है।

हमारी 7 दिवाली की मिठाई, एक-एक करके

1. बेसन के लड्डू

दिवाली पर ज़्यादातर घरों की पहली मिठाई। मोटा बेसन घी में धीमी आँच पर तब तक भूनें जब तक सोंधी ख़ुशबू न आए और रंग सुनहरा न हो जाए, गुनगुना होने दें, फिर बूरा और इलायची मिलाकर लड्डू बाँधें। यहाँ हम गाय का बिलोना घी लेते हैं, क्योंकि इस लड्डू की जान उसकी ख़ुशबू है। 250 ग्राम बेसन के लिए मोटे तौर पर 130 ग्राम घी लगता है।

काम की बात: बूरा तभी मिलाएँ जब बेसन गुनगुना हो, गरम नहीं, वरना लड्डू चिपचिपे होकर फैल जाते हैं। पूरा तरीक़ा और ग़लतियाँ सुधारने के उपाय हमारी बेसन के लड्डू की रेसिपी में हैं।

2. मोहनथाल

राजस्थान और गुजरात की बेसन बर्फ़ी, ज़्यादा भरपूर और दानेदार, अक्सर थोड़े मावे के साथ, थाली में जमाई हुई और ऊपर बादाम-पिस्ता की कतरन। बेसन को पहले धाबा दिया जाता है, यानी घी और दूध मसलकर कुछ देर रखा जाता है, उसी से दाना बनता है। भैंस का घी इसके लिए सबसे ठीक है क्योंकि टुकड़ों को सख़्त जमना होता है। दो कप बेसन में लगभग पौना कप घी मानकर चलिए, और थोड़ा धाबे के लिए।

काम की बात: चाशनी ठीक एक तार पर रुकनी चाहिए। देखिए हमारी मोहनथाल रेसिपी। बिना मावे वाली इसकी सीधी-सादी बहन है हमारी बेसन चक्की।

3. मूंग दाल का हलवा

यह बाँह की परीक्षा लेता है। भिगोकर पीसी मूंग की दाल घी में पकाई जाती है और लगभग घंटे भर चलाई जाती है, जब तक मिश्रण दानेदार न हो जाए और घी अलग न दिखने लगे, फिर दूध, चीनी और इलायची डाली जाती है। इसमें घी काफ़ी लगता है, एक कप दाल में मोटे तौर पर पौने से एक कप, और इसका कोई सच्चा शॉर्टकट नहीं है।

काम की बात: आँच धीमी रखें और पहले बीस मिनट चलाना बिल्कुल न रोकें, उसी समय यह सबसे ज़्यादा चिपकता है। पूरा तरीक़ा हमारी मूंग दाल हलवा रेसिपी में है। इसे दिवाली के पास बनाइए, पहले से नहीं।

4. चूरमा के लड्डू

मोटे गेहूँ के आटे में घी का मोयन, हाथ से दबाए मुठिया, तले या बेक किए, दरदरे पीसे, फिर गरम घी और चीनी या गुड़ मिलाकर लड्डू बाँधे जाते हैं। हमारे घर में मिलाने के लिए भैंस का घी लगता है। आटे के मोयन के अलावा आख़िर में लगभग आधा कप घी और जाता है।

काम की बात: मिश्रण हल्का गुनगुना रहते ही लड्डू बाँधें, वरना चटक जाते हैं। सब कुछ हमारी चूरमा रेसिपी में है।

5. गोंद के लड्डू

सर्दी की मिठाई, जो कई घरों में दिवाली के आसपास से बनने लगती है। खाने वाला गोंद गरम घी में पॉपकॉर्न की तरह फुलाया जाता है, फिर कूटकर घी में भुने आटे, मेवे, कभी नारियल और गुड़ या बूरे के साथ मिलाया जाता है। इनमें घी ख़ूब लगता है, दो कप आटे में लगभग एक कप।

काम की बात: गोंद थोड़ा-थोड़ा करके अच्छे गरम घी में तलें। ठंडे घी में गोंद फूलता नहीं, सख़्त और रबड़ जैसा रह जाता है। रेसिपी: गोंद के लड्डू।

6. आटे के लड्डू और पंजीरी

सबसे सादी मिठाई, और गाँव के कई घरों में सबसे प्यारी। गेहूँ का आटा घी में धीमी आँच पर तब तक भूनें जब तक एक-सा सुनहरा-भूरा न हो जाए और बिस्कुट जैसी ख़ुशबू न आए, फिर बूरा या गुड़, इलायची और कटे मेवे मिलाएँ। खुला रहे तो पंजीरी, बाँध दें तो आटे के लड्डू। दो कप आटे में मोटे तौर पर पौना कप घी। कोई भी घी चलेगा, गाय के घी से ख़ुशबू ज़्यादा आती है।

काम की बात: आटा जितना आप सोचते हैं उससे थोड़ा ज़्यादा भूनें, और कढ़ाई के तले तक चलाएँ ताकि नीचे कच्चा आटा न छिपा रहे। पंजीरी पर एक छोटा हिस्सा हमारे बेसन चक्की वाले लेख के आख़िर में है।

7. घेवर (सच कहें तो हम ख़रीदते हैं)

घेवर जालीदार गोल मिठाई है, घी में तली और चाशनी में डूबी, कभी ऊपर रबड़ी के साथ। यह ज़्यादातर तीज और राखी की मिठाई है, पर दिवाली पर भी दिख जाती है। सीधी बात कहें तो हम इसे घर पर नहीं बनाते। इसके लिए ख़ास साँचा चाहिए, बहुत गरम घी में पतली धार से घोल डालने वाला सधा हुआ हाथ चाहिए, और वह अभ्यास चाहिए जो हलवाई के पास है, हमारे पास नहीं। हम इसे शहर से लाते हैं, और हमेशा पूछते हैं कि किस घी में तला है।

घर की दिवाली मिठाई: पहले क्या बनाएँ

इनमें से ज़्यादातर मिठाइयाँ कई दिन चलती हैं, इसीलिए गाँव की रसोई जल्दी शुरू हो जाती है। रविवार 8 नवंबर की दिवाली से पीछे गिनकर हमारे यहाँ का मोटा क्रम:

  • 10 से 12 दिन पहले: गोंद के लड्डू और आटे के लड्डू। बंद डिब्बे में इस मौसम में तीन-चार हफ़्ते चलते हैं।
  • 5 से 7 दिन पहले: बेसन के लड्डू, बंद डिब्बे में दो-तीन हफ़्ते।
  • 3 से 4 दिन पहले: मोहनथाल या बेसन चक्की, दस दिन से दो हफ़्ते तक।
  • एक दिन पहले या दिवाली की सुबह: चूरमा के लड्डू, जो लगभग एक हफ़्ता चलते हैं, और मूंग दाल का हलवा, जो फ़्रिज में रखकर दो-तीन दिन में खा लेना अच्छा है।
  • धनतेरस पर: घेवर चाहिए तो हलवाई से ले आइए।
हमारी रसोई की बातहर मिठाई डिब्बे में भरने से पहले पूरी ठंडी होने दें, और ढक्कन के नीचे एक काग़ज़ रख दें। गरम लड्डू बंद डिब्बे में पसीजते हैं और कुछ ही दिन में नीचे से नरम और खट्टे हो जाते हैं।
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समय कम हो तो आसान दिवाली मिठाई

अगर बस एक दोपहर ख़ाली है, तो बेसन के लड्डू और आटे के लड्डू बना लीजिए। दोनों के लिए एक कढ़ाई, घर में पड़ा सामान, और चाशनी का कोई झंझट नहीं। एक भरपूर और एक सादा, और दोनों रिश्तेदारों के यहाँ ले जाने में आसान। हलवा किसी फ़ुर्सत वाले इतवार के लिए छोड़ दीजिए।

दिवाली की मिठाइयों में कुल कितना घी लगता है?

ऊपर की मात्राएँ जोड़ें तो घर के हिसाब से दिवाली की मिठाई की चार-पाँच चीज़ें बनाने में आराम से एक किलो घी लग जाता है। यह आम बात है। मिठाई त्योहार का खाना है, जो कुछ हफ़्तों में एक-एक टुकड़ा करके खाई जाती है। साल के बाक़ी दिन रोज़ की चम्मच हल्की रखिए।

अगर इस बार मिठाई के डिब्बे की जगह घी भेजना चाहें, तो हमारे दिवाली गिफ्ट बॉक्स में 200 ml के दो जार आते हैं, क्राफ़्ट बॉक्स में मोम की सील और हाथ से लिखे कार्ड के साथ। इस पेज की ज़्यादातर मिठाइयाँ ऐसे ही एक जार से शुरू होती हैं। और दिवाली की रात पूजा के दीये भी उसी जार से भर सकते हैं, कैसे, यह हमारे दिवाली पर घी का दीया वाले लेख में है।

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दिवाली की मिठाई के लिए कौन सा घी सबसे अच्छा है?

मिठाई के लिए आम तौर पर भैंस का घी लगता है, क्योंकि यह गाढ़ा होता है, सख़्त जमता है और रंग हल्का रखता है। गाय के बिलोना घी में ख़ुशबू ज़्यादा होती है, इसलिए बेसन और आटे के लड्डू में अच्छा लगता है। कई घर भैंस के घी में भूनकर ऊपर से गाय का घी डालते हैं।

दिवाली की कौन सी मिठाई एक-दो हफ़्ते पहले बना सकते हैं?

गोंद के लड्डू और आटे के लड्डू बंद डिब्बे में तीन-चार हफ़्ते चलते हैं। बेसन के लड्डू दो-तीन हफ़्ते, मोहनथाल या बेसन चक्की दस दिन से दो हफ़्ते। चूरमा के लड्डू लगभग एक हफ़्ता चलते हैं, और मूंग दाल का हलवा ताज़ा ही बनाइए।

घर पर बनाने के लिए सबसे आसान दिवाली मिठाई कौन सी है?

बेसन के लड्डू और आटे के लड्डू सबसे आसान हैं। दोनों में एक कढ़ाई, घर में पड़ा सामान, और चाशनी नहीं। आटा या बेसन घी में धीरे भूनें, गुनगुना होने दें, फिर बूरा, इलायची और मेवे मिलाकर लड्डू बाँध लें।

दिवाली की मिठाई के लिए कितना घी चाहिए?

यह इस पर है कि आप क्या बना रहे हैं। 250 ग्राम बेसन के लड्डू में लगभग 130 ग्राम घी लगता है, जबकि गोंद के लड्डू और मूंग दाल के हलवे में इससे काफ़ी ज़्यादा। घर के हिसाब से चार-पाँच मिठाइयाँ आराम से एक किलो घी ले लेती हैं।

घर के लड्डू डिब्बे में नरम या खट्टे क्यों हो जाते हैं?

ज़्यादातर इसलिए कि लड्डू गरम ही डिब्बे में भर दिए गए। बंद डिब्बे में भाप रुक जाती है, लड्डू पसीजते हैं, नीचे से नरम होते हैं और खट्टे भी हो सकते हैं। हर मिठाई पूरी ठंडी होने दें और ढक्कन के नीचे काग़ज़ रखें।

क्या दिवाली पर घेवर घर पर बना सकते हैं?

बना सकते हैं, पर मुश्किल है। घेवर के लिए ख़ास साँचा, बहुत गरम घी और पतली धार से घोल डालने वाला सधा हाथ चाहिए। हमारे समेत ज़्यादातर घर इसे हलवाई से ख़रीदते हैं और पूछ लेते हैं कि किस घी में तला गया है।

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कुकीज़ के बारे में एक छोटी बातहम Google Analytics से समझते हैं कि लोगों को कौन-सा घी पसंद है, और Meta Pixel से साइट पर आए लोगों को Facebook, Instagram और WhatsApp पर हमारा घी दिखाते हैं। आपका नाम, फ़ोन और पता कभी साझा नहीं होता, कुछ बेचा नहीं जाता। प्राइवेसी पॉलिसी