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रेसिपी

गोंद के लड्डू: शेखावाटी वाले सर्दी के लड्डू, पूरी विधि

म्हारा की रसोई से, शेखावाटी · 7 मिनट ·
मिट्टी की प्लेट में फूले गोंद, बादाम और नारियल वाले गोंद के लड्डू, पास में कच्ची गोंद, गुड़ और गाय के घी का जार

गोंद के लड्डू बनाने के लिए खाने वाले गोंद को घी में तब तक तलते हैं जब तक वह फूल न जाए, फिर उसे घी में भुने गेहूँ के आटे, मेवे, सूखे नारियल, इलायची और गुड़ या बूरे के साथ मिलाते हैं। लड्डू गुनगुने रहते बाँधे जाते हैं और तीन-चार हफ़्ते चलते हैं।

शेखावाटी में सर्दी की सुबह लगभग 4 °C से शुरू होती है, और दिसंबर के पहले हफ़्ते तक हमारे गाँव की ज़्यादातर रसोइयों में ऊपर वाली ताक पर गोंद के लड्डू का स्टील का डिब्बा रखा मिलता है। खेत जाने से पहले गरम दूध के गिलास के साथ एक लड्डू, और ठंड थोड़ी दूर लगने लगती है। जब परिवार में बच्चा होता है, तो यही लड्डू घर के बड़ों के हाथ से बने, बड़े डिब्बों में आते हैं। गोंद के लड्डू हम घर पर ऐसे ही बनाते हैं: घी में फूला गोंद, घी में भुना आटा, मेवे, थोड़ी सोंठ, और सबको बाँधने के लिए गुड़।

बनाना मुश्किल नहीं है। बस एक घंटा, एक भारी कड़ाही, और गुनगुने मिश्रण को नंगे हाथों से बाँधने का हौसला चाहिए।

गोंद क्या है, और कौन सा ख़रीदें?

लड्डू वाला गोंद बबूल के पेड़ का सूखा रस है। यह सख़्त, हल्के पीले से हल्के भूरे रंग के दानों में आता है और किराने व पंसारी की दुकान पर खुला मिलता है, ख़ासकर सर्दी में। महाराष्ट्र में इन्हीं लड्डुओं को डिंक लाडू कहते हैं।

इसे गोंद कतीरा न समझें। गोंद कतीरा अलग चीज़ है, सफ़ेद और परतदार, जिसे पानी में भिगोकर गर्मी के शरबत में डालते हैं। यह घी में नहीं फूलता और यहाँ काम नहीं आएगा। पक्का न हो तो दुकानदार से लड्डू वाला गोंद माँगें।

साफ़, चमकदार दाने लें जिनमें छाल न मिली हो। दाने चने से बड़े हों तो कपड़े में रखकर बेलन से हल्का कूट लें। छोटे, एक जैसे टुकड़े बराबर तलते हैं।

घी में गोंद तलना, जब तक फूल न जाए

यही एक क़दम है जिसमें गड़बड़ हो सकती है। कड़ाही में लगभग ⅓ कप घी मध्यम आँच पर गरम करें। गोंद का एक टुकड़ा डालें। कुछ सेकंड में सफ़ेद होकर फूल जाए तो घी तैयार है। नीचे बैठा रहे तो घी कम गरम है। तुरंत भूरा हो जाए तो बहुत गरम है।

गोंद थोड़ा-थोड़ा, एक बार में एक-दो बड़े चम्मच, चलाते हुए तलें। हर टुकड़ा अपने आकार से दो-तीन गुना फूले, सफ़ेद और कुरकुरा हो जाए, छोटे से पॉपकॉर्न जैसा। झारे से निकाल लें। ठंडा होने पर कटोरी के तले या बेलन से कूट लें। कुछ लोगों को छोटे टुकड़े पसंद हैं, कुछ को लगभग पाउडर।

आगे बढ़ने से पहले एक टुकड़ा चखें। दाँत लगते ही कुरकुराए और फिर घुल जाए। अगर रबड़ जैसा लगे या दाँतों में चिपके, तो गोंद पूरा नहीं फूला। उसे फिर से तलें। लड्डू में चिपचिपा गोंद सबसे आम शिकायत है, और यह पूरी तरह टाली जा सकती है।

आटा भूनना

गेहूँ का आटा लें, मिल जाए तो मोटा। गोंद तलने के बाद बचे घी के साथ कड़ाही में लगभग ½ कप घी और डालें। 2 कप आटा डालें और धीमी आँच पर लगातार चलाते हुए 20 से 25 मिनट भूनें। जब रंग हल्का भूरा हो जाए, मिश्रण ढीला हो जाए और रसोई में ताज़े भुने गेहूँ की ख़ुशबू आए, अच्छे आटे के हलवे जैसी, तब आटा भुन गया।

आँच धीमी रखें। आटा जल्दी जलता है, और जला आटा पूरे लड्डुओं को कड़वा कर देता है। हमारी बेसन चक्की और बेसन के लड्डू में बेसन की यही धीमी भुनाई है, पहले छोटी मात्रा में हाथ साफ़ करना हो तो वहाँ से शुरू करें।

जिस घी में आटा भुनता है, लड्डू का स्वाद वही बनता है, इसलिए यहाँ देसी गाय का बिलोना घी सबसे अच्छा रहता है। इसकी सोंधी ख़ुशबू भुने आटे में गहराई तक उतरती है और गुड़ के साथ ख़ूब जँचती है। भैंस के घी से भी बनते हैं, लड्डू ज़्यादा भरपूर और नरम बनते हैं।

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गुड़ या बूरा, मेवे और सोंठ

आटा भुन रहा हो, तब तक बाक़ी तैयारी कर लें:

  • मेवे: ½-½ कप बादाम और काजू, एक चम्मच घी में हल्के भूनकर मोटे कटे हुए। कुछ घरों में आधा कप भुने, कुटे मखाने भी डालते हैं।
  • सूखा नारियल: ½ कप कसा हुआ, कड़ाही में एक मिनट सोंधी ख़ुशबू आने तक भुना हुआ।
  • मसाला: 1 छोटा चम्मच इलायची पाउडर और 1 छोटा चम्मच सोंठ। सोंठ ज़रूरी नहीं, पर सर्दी के लड्डुओं में पारंपरिक है।
  • मिठास: 1 कप (200 ग्राम) कसा गुड़ या बूरा। गाँव में गुड़ ही चलता है। बूरे से लड्डू हल्के रंग के और ज़्यादा मीठे बनते हैं।

भुना आटा, कुटा गोंद, मेवे, नारियल और मसाले एक बड़ी परात में मिलाएँ। इतना ठंडा होने दें कि हाथ आराम से डाल सकें, फिर गुड़ या बूरा डालकर अच्छी तरह मिलाएँ। बहुत गरम आटे में गुड़ डालेंगे तो वह पिघलकर गाँठें बना देगा।

हमारी रसोई की बातगुड़ सख़्त हो और कसा न जाए, तो उसे 2 बड़े चम्मच घी के साथ सबसे धीमी आँच पर बस पिघलने तक गरम करें और तुरंत गुनगुने मिश्रण पर डाल दें। इसे और न पकाएँ, वरना लड्डू पत्थर जैसे सख़्त जमेंगे।

गोंद के लड्डू बाँधना, गुनगुने रहते ही

गुनगुने मिश्रण की मुट्ठी भरकर हथेली में कसकर दबाएँ, फिर दोनों हथेलियों के बीच घुमाकर गोल लड्डू बनाएँ। बँध जाए तो आगे बढ़ते रहें। बिखरे तो 1 से 2 बड़े चम्मच गरम पिघला घी डालकर फिर मिलाएँ। बस गरम घी ही इसका इलाज है।

सारे लड्डू मिश्रण गुनगुना रहते ही बाँध लें। ठंडा होने पर घी जम जाता है और मिश्रण बँधना बंद कर देता है। ऐसा हो तो कड़ाही में सबसे धीमी आँच पर एक मिनट गरम कर लें। इस मात्रा से नींबू के आकार के 18 से 20 लड्डू बनते हैं।

गोंद के लड्डू के फ़ायदे: परंपरा क्या कहती है, सच-सच

गोंद के लड्डू सर्दी के लिए और डिलीवरी के बाद नई माँ के लिए इसलिए बनते हैं क्योंकि इनमें भरपूर ताक़त होती है: घी, गेहूँ, मेवे और गुड़ एक ही कौर में। हमारी परंपरा में माना जाता है कि ये शरीर को गरम रखते हैं और माँ को फिर से ताक़त देते हैं। गोंद ख़ुद ज़्यादातर घुलने वाला फ़ाइबर है।

पर इस बात का कोई पक्का वैज्ञानिक सबूत नहीं है कि पेट भरने वाले, ज़्यादा कैलोरी वाले खाने से बढ़कर गोंद के लड्डू कुछ ख़ास करते हैं। इंटरनेट पर लिखे ज़्यादातर "फ़ायदे" परंपरा हैं, शोध नहीं। इसका मतलब यह नहीं कि ये बेकार हैं। मतलब यह है कि दिन में एक लड्डू काफ़ी है, तीन नहीं। इस मात्रा के हर लड्डू में लगभग दो छोटी चम्मच घी होता है, जो दिन भर की समझदार मात्रा का बड़ा हिस्सा है, जैसा हमने रोज़ कितना घी खाना चाहिए में बताया है।

नई माँ का खाना डिलीवरी कैसी हुई, वज़न और डायबिटीज़ जैसी किसी बीमारी पर निर्भर करता है, इसलिए घर का कोई भी तरीक़ा अपनाने से पहले डॉक्टर से पूछ लें। इस बारे में हमने प्रेग्नेंसी में घी में और लिखा है। डायबिटीज़ वाले गुड़ का ध्यान रखें।

गड़बड़ हो तो क्या करें, और लड्डू कितने दिन चलते हैं

  • चिपचिपा गोंद: पूरा नहीं फूला। अगली बार ज़्यादा गरम घी में तलें।
  • लड्डू नहीं बँध रहे: मिश्रण ठंडा हो गया या घी कम है। गरम करें और गरम घी डालें।
  • कड़वा स्वाद: तेज़ आँच पर आटा या गोंद जल गया।
  • बहुत सख़्त: गुड़ की चाशनी बन गई।

गोंद के लड्डू स्टील या काँच के हवाबंद डिब्बे में सर्दी भर कमरे के तापमान पर 3 से 4 हफ़्ते चलते हैं। डिब्बा बंद करने से पहले लड्डू पूरे ठंडे होने दें। दूसरे शहर में परिवार को भेजने हों तो बटर पेपर लगे स्टील के डिब्बे में पैक करें। गोंद के लड्डू सफ़र में ख़राब नहीं होते, क्योंकि इनमें दूध या पानी नहीं होता।

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रेसिपी कार्ड

15 मिनटतैयारी45 मिनटपकाना18लोगों के लिए

सामग्री

  • आधा कप (60–70 ग्राम) खाने वाला गोंद, चने के आकार के टुकड़ों में
  • कुल लगभग 1 कप (200 ग्राम) देसी गाय का बिलोना घी: ⅓ कप गोंद तलने के लिए, आधा कप आटा भूनने के लिए, बाक़ी बाँधने के लिए
  • 2 कप (250 ग्राम) गेहूँ का आटा, हो सके तो मोटा
  • आधा कप (70 ग्राम) बादाम
  • आधा कप (70 ग्राम) काजू
  • आधा कप (40 ग्राम) कसा सूखा नारियल
  • आधा कप भुने मखाने, कुटे हुए (वैकल्पिक)
  • 1 छोटा चम्मच हरी इलायची पाउडर
  • 1 छोटा चम्मच सोंठ, वैकल्पिक
  • 1 कप (200 ग्राम) कसा गुड़ या बूरा

विधि

  1. ⅓ कप घी मध्यम आँच पर गरम करें। गोंद का एक टुकड़ा डालकर देखें: कुछ सेकंड में सफ़ेद होकर फूल जाए तो घी तैयार है।
  2. गोंद थोड़ा-थोड़ा डालकर चलाते हुए तलें, जब तक हर टुकड़ा फूलकर सफ़ेद और कुरकुरा न हो जाए। निकालकर ठंडा होने दें।
  3. एक टुकड़ा चखें। चिपचिपा लगे तो फिर से तलें। फूले गोंद को कटोरी या बेलन से कूट लें।
  4. बादाम और काजू एक चम्मच घी में हल्के भूनकर मोटे काट लें। नारियल एक मिनट सोंधी ख़ुशबू आने तक भूनें।
  5. बचे घी के साथ कड़ाही में आधा कप घी और डालें। आटा डालकर धीमी आँच पर चलाते हुए 20–25 मिनट हल्का भूरा और ख़ुशबूदार होने तक भूनें।
  6. बड़ी परात में भुना आटा, गोंद, मेवे, नारियल, मखाने, इलायची और सोंठ मिलाएँ।
  7. इतना ठंडा होने दें कि हाथ आराम से डाल सकें, फिर गुड़ या बूरा मिलाएँ।
  8. मुट्ठी में दबाकर देखें। बिखरे तो 1–2 बड़े चम्मच गरम पिघला घी डालकर फिर मिलाएँ।
  9. मिश्रण गुनगुना रहते ही लड्डू बाँधें। ठंडा होकर न बँधे तो सबसे धीमी आँच पर एक मिनट गरम कर लें।
  10. पूरा ठंडा करके हवाबंद डिब्बे में कमरे के तापमान पर 3–4 हफ़्ते रखें।

लोग ये भी पूछते हैं

मेरे लड्डू में गोंद चिपचिपा क्यों है?

तलते समय गोंद पूरा नहीं फूला, अक्सर इसलिए कि घी कम गरम था या एक साथ ज़्यादा गोंद डाल दिया। मध्यम गरम घी में थोड़ा-थोड़ा तलें, जब तक हर टुकड़ा फूलकर सफ़ेद न हो जाए और चखने पर कुरकुराए।

गोंद और गोंद कतीरा में क्या फ़र्क़ है?

गोंद बबूल के पेड़ का खाने वाला रस है जो गरम घी में फूलता है और सर्दी के लड्डुओं में पड़ता है। गोंद कतीरा अलग चीज़ है, जिसे पानी में भिगोकर गर्मी के शरबत में डालते हैं। यह घी में नहीं फूलता और इस रेसिपी में काम नहीं आएगा।

दिन में कितने गोंद के लड्डू खा सकते हैं?

ज़्यादातर बड़ों के लिए दिन में एक काफ़ी है। हर लड्डू में घी, गेहूँ, मेवे और गुड़ भरपूर होता है, इसलिए यह पेट भरने वाला, ज़्यादा कैलोरी वाला खाना है। वज़न या शुगर पर ध्यान दे रहे हैं तो कभी-कभार खाएँ और डॉक्टर से पूछें।

क्या डिलीवरी के बाद गोंद के लड्डू अच्छे हैं?

कई भारतीय परिवारों में नई माँ के लिए यह पारंपरिक खाना है, क्योंकि इनमें भरपूर ताक़त होती है। इनके ख़ास फ़ायदों पर वैज्ञानिक शोध बहुत कम है। डिलीवरी के बाद का खाना माँ की सेहत पर निर्भर करता है, इसलिए कोई भी तरीक़ा अपनाने से पहले डॉक्टर से पूछें।

गोंद के लड्डू बँध क्यों नहीं रहे?

मिश्रण या तो बहुत ठंडा हो गया है या उसमें घी कम है। कड़ाही में सबसे धीमी आँच पर एक मिनट गरम करें, 1 से 2 बड़े चम्मच गरम पिघला घी डालें, और मिश्रण गुनगुना रहते ही लड्डू बाँध लें।

गोंद के लड्डू कितने दिन चलते हैं?

सर्दी में स्टील या काँच के हवाबंद डिब्बे में कमरे के तापमान पर लगभग 3 से 4 हफ़्ते। डिब्बा बंद करने से पहले लड्डू पूरे ठंडे होने दें ताकि अंदर भाप न रुके, और डिब्बा चूल्हे से दूर रखें।

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कुकीज़ के बारे में एक छोटी बातहम Google Analytics से समझते हैं कि लोगों को कौन-सा घी पसंद है, और Meta Pixel से साइट पर आए लोगों को Facebook, Instagram और WhatsApp पर हमारा घी दिखाते हैं। आपका नाम, फ़ोन और पता कभी साझा नहीं होता, कुछ बेचा नहीं जाता। प्राइवेसी पॉलिसी