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असली घी की पहचान: घर पर 5 जाँच, और वे क्या नहीं बता सकतीं

म्हारा की रसोई से, शेखावाटी · 9 मिनट ·
स्टील की छोटी कड़ाही में पिघलता घी, पास में काँच का जार और पीतल की कटोरी

असली घी की पहचान के लिए घर पर कुछ आसान जाँचें की जा सकती हैं, जैसे स्टार्च के लिए आयोडीन और ख़ुशबू के लिए कड़ाही वाली जाँच, लेकिन ये सिर्फ़ मोटी मिलावट पकड़ती हैं। कोई घरेलू जाँच शुद्धता साबित नहीं करती। लेबल ज़्यादा बताता है, और पक्का सिर्फ़ लैब बता सकती है।

घी की शुद्धता जाँचने के नुस्ख़े फ़ोन पर बहुत तेज़ी से घूमते हैं, और ज़्यादातर रसोई की हैसियत से ज़्यादा वादा करते हैं। इसलिए यहाँ असली घी की पहचान के लिए घर पर किए जाने वाले पाँच आम तरीक़े हैं, हर तरीक़ा असल में क्या दिखाता है, और कहाँ जाकर वह काम का नहीं रहता। इनमें से कुछ जाँचें करने लायक़ हैं। एक लगभग बेकार है। और कोई भी जाँच यह साबित नहीं कर सकती कि जार का घी शुद्ध है।

"नक़ली घी" का आम तौर पर मतलब क्या होता है

जाँच से पहले यह जानना ज़रूरी है कि ढूँढ क्या रहे हैं। घी में मिलावट उसे सस्ता करने के लिए होती है, इसलिए मिलाई जाने वाली चीज़ें वे होती हैं जो दूध की वसा से सस्ती हों:

  • वनस्पति, यानी हाइड्रोजनेटेड वनस्पति वसा
  • सस्ते रिफ़ाइंड तेल
  • स्टार्च, जैसे मसला आलू, ताकि घी गाढ़ा लगे
  • ऊपर से मिलाई गई ख़ुशबू या रंग, ताकि बाक़ी सब छिप जाए

नीचे की हर घरेलू जाँच इनमें से ज़्यादा से ज़्यादा एक-दो चीज़ें पकड़ती है, और वह भी तब जब मिलावट ज़्यादा हो। थोड़ी मात्रा में सोच-समझकर की गई मिलावट रसोई की हर जाँच पार कर जाती है। पढ़ते समय यह बात ध्यान में रखें।

असली घी की पहचान: घर पर 5 आम जाँचें

ये जाँचें हमेशा साफ़, सूखी चम्मच या कटोरी में थोड़े से नमूने से करें, जार के अंदर कभी नहीं।

जाँच 1: हथेली पर घी

जमे घी की छोटी चम्मच हथेली पर रखकर थोड़ी देर पकड़ें। शुद्ध घी एक-आध मिनट में नरम होकर पिघलने लगता है, क्योंकि दूध की वसा का अच्छा-ख़ासा हिस्सा शरीर की गर्मी के आसपास पिघल जाता है। अगर घी बहुत देर तक सख़्त और मोम जैसा बना रहे, तो इसे ध्यान में रखें।

क्या दिखाती है: ज़्यादा वनस्पति मिली हो तो घी हथेली पर देर से और चिपचिपा पिघलता है, क्योंकि वनस्पति को पिघलने के लिए ज़्यादा गर्मी चाहिए।

सीमा: ठंडे हाथ, ठंडा कमरा और भैंस का घी, ये सब भी देर से पिघलते हैं, और तरल तेल मिला घी जल्दी पिघलता है, इसलिए मिलावटी घी आसानी से पास हो सकता है। इसे बस पहला अंदाज़ा मानें।

जाँच 2: कड़ाही में गरम करके सूँघें

एक छोटी स्टील की कड़ाही में धीमी आँच पर एक चम्मच घी डालें। शुद्ध घी जल्दी पिघलता है, साफ़ हो जाता है, और उसमें से वही गरम, सोंधी ख़ुशबू आती है जो अच्छे तड़के में आती है। कुछ लोग कहते हैं कि पिघले घी का रंग ज़्यादा बताता है, लेकिन रंग दूध और पकाने के समय पर निर्भर करता है, इसलिए उस पर भरोसा न करें।

क्या दिखाती है: आपकी नाक सबसे अच्छा औज़ार है। सादे खाने के तेल जैसी गंध, तीखी या साबुन जैसी गंध, या पुराने तेल और पेंट जैसी बासी गंध बताती है कि कुछ गड़बड़ है, या तो जार की चीज़ में या उसे रखने के तरीक़े में।

सीमा: ऊपर से मिलाई जाने वाली ख़ुशबू इसीलिए बनती है, ताकि मिलावट भी घी जैसी महके। अच्छी ख़ुशबू अच्छा संकेत है, सबूत नहीं।

जाँच 3: पानी वाली जाँच

यह WhatsApp पर ख़ूब घूमती है: पिघले घी की चम्मच पानी के गिलास में डालो, तैरे तो असली, डूबे तो नक़ली। दिक़्क़त यह है कि हर वसा और हर तेल पानी पर तैरता है। वनस्पति भी तैरता है, रिफ़ाइंड तेल भी। इसलिए यह जाँच घी के बारे में लगभग कुछ नहीं बताती, हम इसे छोड़ देंगे।

जाँच 4: आयोडीन से स्टार्च की जाँच

यह एक असली रासायनिक जाँच है, और इसी तरह की आसान जाँचें FSSAI ने खाने में मिलावट पकड़ने वाली अपनी DART पुस्तिका में दी हैं। इसके लिए टिंचर आयोडीन चाहिए, जो कई फ़र्स्ट-एड डिब्बों में या केमिस्ट के पास मिल जाता है।

  1. थोड़ा घी पिघलाकर उसमें से आधा चम्मच एक छोटे काँच के गिलास या सफ़ेद कटोरी में लें।
  2. दो-तीन बूँद टिंचर आयोडीन डालें।
  3. एक मिनट बाद रंग देखें।

अगर रंग नीला या बैंगनी हो जाए, तो उसमें स्टार्च है, और शुद्ध घी में स्टार्च नहीं होना चाहिए। अगर आयोडीन का भूरा रंग ही बना रहे, तो स्टार्च नहीं है।

सीमा: यह सिर्फ़ स्टार्च पकड़ती है। वनस्पति, तेल या जानवरों की चर्बी इसमें नहीं दिखती।

खाने से दूर रखेंयह जाँच अलग कटोरी में करें और नमूना बाद में फेंक दें। आयोडीन खाने या पकाने की चीज़ नहीं है, इसके दाग़ लगते हैं, और इसे बच्चों से दूर रखें। बचा हुआ घी कभी वापस जार में न डालें।

जाँच 5: पिघलाकर फ़्रिज में रखें

कुछ चम्मच घी एक छोटे काँच के जार में लेकर उसे गरम पानी में खड़ा करके पिघलाएँ। घी पूरा साफ़ हो जाए तो जार को कमरे के तापमान तक ठंडा होने दें, फिर कुछ घंटों के लिए फ़्रिज में रखें और देखें। गरम काँच का जार सीधे फ़्रिज में कभी न रखें। लोग कहते हैं कि अलग-अलग परतें बनें तो कोई तेल मिला है, क्योंकि तरल तेल ठंड में भी पतले रहते हैं जबकि दूध की वसा जम जाती है।

क्या दिखाती है: अगर घंटों फ़्रिज में रहने के बाद भी एक मोटी, साफ़, तेल जैसी परत न जमे, तो शायद कोई तरल तेल मिला है, और बेचने वाले से इस बारे में पूछना चाहिए।

सीमा: शुद्ध घी भी परतों में बँटता है। दूध की वसा अलग-अलग तापमान पर जमने वाली वसाओं का मेल है, इसलिए ऊपर पतली तरल परत सामान्य है, जैसा हमने सर्दी में घी क्यों जमता है में समझाया है। और वनस्पति भी घी की तरह सख़्त जमता है, तो वह इस जाँच में आराम से पास हो जाता है।

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घी जाँचने से पहले लेबल पढ़ें

अक्सर लेबल रसोई की किसी भी जाँच से ज़्यादा बताता है। ये बातें देखें:

  • FSSAI लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन नंबर। भारत में हर खाद्य व्यवसाय के लिए यह ज़रूरी है, और यह जार पर छपा होना चाहिए। यह 14 अंकों का नंबर होता है।
  • बनाने या पैक करने वाले का नाम-पता। कोई असली जगह, जहाँ जाकर देखा जा सके।
  • सामग्री। घी में सिर्फ़ दूध की वसा या घी लिखा होना चाहिए, और कुछ नहीं। "वनस्पति", "खाद्य वनस्पति तेल", "हाइड्रोजनेटेड" या "मिलाई गई ख़ुशबू" जैसे शब्दों का मतलब है कि यह शुद्ध घी नहीं है, सामने चाहे जो लिखा हो। ये शब्द हमने देसी घी और वनस्पति वाले लेख में समझाए हैं।
  • पैकिंग की तारीख़ और बेस्ट बिफ़ोर। ताज़ा घी की ख़ुशबू बेहतर होती है, और तारीख़ न होना अच्छा संकेत नहीं।

नक़ली बिलोना घी की पहचान कैसे करें

लोग असल में यही जानना चाहते हैं, और सच यह है कि घर पर यह नहीं हो सकता। ऊपर की सब जाँचें बस यह देखती हैं कि जार में घी है या नहीं। इनमें से कोई भी पूरे दूध के दही वाले घी को मलाई या डेयरी मक्खन वाले घी से अलग नहीं कर सकती, क्योंकि तीनों असली दूध की वसा हैं।

स्वाद से थोड़ा अंदाज़ा मिलता है। पूरे दूध के दही से बने बिलोना घी में आम तौर पर गहरी, सोंधी ख़ुशबू और हल्का खट्टापन होता है। लेकिन यह अंदाज़ा है, और हर किसी की नाक अलग है। जो आप जाँच सकते हैं, वह यह है कि बेचने वाला तरीक़ा साफ़ बताता है या नहीं। बिलोना घी क्या है और दही से बना घी और मलाई का घी पढ़ें, फिर प्रोडक्ट पेज पर लिखी बात से मिलाएँ। जो बेचने वाला साफ़ कहता है कि यह जार पूरे दूध के दही से है और वह मलाई से, वह आपको एक ऐसी बात देता है जिस पर आप उसे परख सकें।

पक्का सबूत सिर्फ़ लैब से

घी के लिए FSSAI का मानक लैब की भाषा में लिखा है। फ़ूड टेस्टिंग लैब BR रीडिंग और RM वैल्यू जैसी चीज़ें मापती है, जिनसे पता चलता है कि वसा दूध की वसा जैसी है या नहीं, और वनस्पति वसा की मिलावट के लिए अलग जाँचें करती है, जैसे तिल के तेल के लिए Baudouin टेस्ट। रसोई में इनमें से कुछ भी नहीं हो सकता।

अगर आप थोक में घी लेते हैं, या शुद्धता आपके लिए बहुत मायने रखती है, तो पक्का तरीक़ा है किसी NABL मान्यता वाली फ़ूड लैब में नमूना भेजना, या बेचने वाले से ऐसी लैब की हाल की रिपोर्ट माँगना। रिपोर्ट की तारीख़ और लैब का नाम देखें, और यह भी कि रिपोर्ट घी की ही है, किसी और चीज़ की नहीं।

हम ख़ुद घर पर क्या करते

अगर हम किसी नए से घी ख़रीदते, तो तीन काम करते। लेबल और FSSAI नंबर पढ़ते। एक बार आयोडीन वाली जाँच करते, क्योंकि यह सस्ती है और साफ़ नतीजा देती है। और फिर उसमें खाना बनाते: गरम चावल या ताज़ी रोटी पर एक चम्मच ख़ुशबू और स्वाद के बारे में बहुत कुछ बता देती है। इसके बाद सबसे अच्छी जाँच वही है जो आप बाक़ी हर चीज़ में करते हैं: उन लोगों से लें जो आपके सवालों का सीधा जवाब दें और बताएँ कि दूध कहाँ से आता है। इसीलिए हम अपने देसी गाय बिलोना घी, उसके गाँव और उसके तरीक़े के बारे में इतने विस्तार से लिखते हैं।

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घर पर असली घी की पहचान कैसे करें?

पहले लेबल पढ़ें, फिर स्टार्च के लिए आयोडीन वाली जाँच और ख़ुशबू के लिए कड़ाही वाली जाँच करें। इनसे मोटी मिलावट पकड़ी जा सकती है। घी शुद्ध है, यह कोई घरेलू जाँच साबित नहीं कर सकती, सिर्फ़ लैब कर सकती है।

क्या पानी में डालने से नक़ली घी का पता चलता है?

असल में नहीं। हर वसा और तेल पानी पर तैरता है, वनस्पति और रिफ़ाइंड तेल भी। घी का तैरना शुद्धता के बारे में लगभग कुछ नहीं बताता।

घर पर घी में वनस्पति की जाँच कैसे करें?

रसोई में वनस्पति पकड़ने की कोई भरोसेमंद जाँच नहीं है। यह घी की तरह जमता भी है और तैरता भी है। सामग्री में वनस्पति या हाइड्रोजनेटेड जैसे शब्द देखें, और पक्का जानना हो तो लैब जाँच कराएँ।

क्या घर पर नक़ली बिलोना घी पहचाना जा सकता है?

नहीं। बिलोना, मलाई और मक्खन से बना घी, तीनों असली दूध की वसा हैं, इसलिए घरेलू जाँच इन्हें अलग नहीं कर सकती। ख़ुशबू से अंदाज़ा मिलता है, पर असली जाँच यह है कि बेचने वाला तरीक़ा साफ़ बताता है या नहीं।

आयोडीन जाँच में नीला रंग आने का क्या मतलब है?

आयोडीन डालने पर नीला या बैंगनी रंग आए तो घी में स्टार्च है। शुद्ध घी में स्टार्च नहीं होता। जाँच वाला नमूना बाद में फेंक दें, वापस जार में न मिलाएँ।

क्या शुद्ध घी सर्दी में हमेशा जमता है?

शुद्ध घी आम तौर पर ठंड में जम जाता है, पर सिर्फ़ जमना सबूत नहीं है। वनस्पति भी सख़्त जमता है, और शुद्ध घी में ऊपर पतली तरल परत होना सामान्य है।

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कुकीज़ के बारे में एक छोटी बातहम Google Analytics से समझते हैं कि लोगों को कौन-सा घी पसंद है, और Meta Pixel से साइट पर आए लोगों को Facebook, Instagram और WhatsApp पर हमारा घी दिखाते हैं। आपका नाम, फ़ोन और पता कभी साझा नहीं होता, कुछ बेचा नहीं जाता। प्राइवेसी पॉलिसी