बच्चों को घी कब देना चाहिए, कितना दें और कैसे खिलाएँ

बच्चों को घी कब देना चाहिए, इसका सीधा जवाब है: तभी, जब बच्चा ठोस खाना शुरू कर दे, यानी लगभग 6 महीने के बाद, और वह भी बच्चों के डॉक्टर की सलाह से। शुरुआत गरम दाल-चावल, खिचड़ी या मसली सब्ज़ी में कुछ बूँदों से करें और धीरे-धीरे बढ़ाएँ। घी खाना है, वज़न बढ़ाने की दवा नहीं।
हमारे गाँव में बच्चे का पहला ढंग का खाना अक्सर मूँग दाल की खिचड़ी के कुछ चम्मच होते हैं, नरम पकी और मसली हुई। और लगभग हमेशा घर का कोई बड़ा घी का जार और बड़ी चम्मच लेकर कटोरी के पास खड़ा होता है। गाँव के बुज़ुर्ग कहते हैं कि उनके ज़माने में बच्चों को पूरी चम्मच घी मिलता था। आज के बहुत से माँ-बाप तीन बूँदों पर रुक जाते हैं। दोनों बच्चे का भला ही चाहते हैं, और चम्मच और बूँदों के बीच का यही फ़र्क़ इस लेख की बात है।
नए माँ-बाप सबसे पहले जो सवाल पूछते हैं, उनमें से एक है कि बच्चों को घी कब देना चाहिए, और अक्सर तब तक घर के कोई बड़े चम्मच हाथ में ले चुके होते हैं। यहाँ बता रहे हैं कि हम घर पर क्या करते हैं, बच्चों के खाने की आम डॉक्टरी सलाह क्या कहती है, और कौन सी बातें सिर्फ़ आपके बच्चे के डॉक्टर ही तय कर सकते हैं।
बच्चों को घी कब देना चाहिए?
ठोस खाना शुरू होने से पहले बिल्कुल नहीं। पहले छह महीने WHO और भारत के बच्चों के डॉक्टरों की आम सलाह यही है कि बच्चे को सिर्फ़ माँ का दूध दें, या ज़रूरत हो तो फ़ॉर्मूला, और डॉक्टर के कहे बिना कुछ और नहीं। यानी इन महीनों में न घी, न घुट्टी, न पानी और न शहद।
ठोस खाना आम तौर पर लगभग छह महीने पर, डॉक्टर की सलाह से शुरू होता है। कुछ डॉक्टर ठोस खाने के शुरुआती हफ़्तों से ही घी की कुछ बूँदों को ठीक मानते हैं। कुछ चाहते हैं कि बच्चा पहले दिन में दो-तीन बार ठीक से खाने लगे, जो अक्सर सात से नौ महीने के बीच होता है। दोनों बातें आम हैं। छह महीने वाली जाँच में पूछ लीजिए और अपने बच्चे के लिए डॉक्टर जो कहें, वही कीजिए।
एक छोटी पर ज़रूरी बात: बहुत से घरों में आज भी जन्म घुट्टी में नवजात को शहद चटाया जाता है। एक साल से छोटे बच्चे को शहद बिल्कुल नहीं देना चाहिए, क्योंकि इससे शिशु बोटुलिज़्म नाम की एक दुर्लभ पर गंभीर बीमारी हो सकती है। घर के बड़े रस्म निभाना चाहें, तो शहद छोड़ दीजिए और बच्चे को कुछ भी देने से पहले डॉक्टर से पूछ लीजिए।
बच्चे को कितना घी देना चाहिए?
बहुत थोड़ा, और धीरे-धीरे। भारत के कई बच्चों के डॉक्टर और डाइटीशियन मोटे तौर पर ऐसा क्रम बताते हैं:
- ठोस खाने के पहले कुछ हफ़्ते: एक बार के खाने में 2 से 3 बूँदें, अच्छी तरह मिलाकर।
- जब बच्चा मज़े से खाने लगे: एक बार के खाने में लगभग चौथाई छोटी चम्मच तक।
- एक साल के आसपास और उसके बाद: एक बार के खाने में लगभग आधी छोटी चम्मच, और दो-तीन साल की उम्र तक लगभग एक छोटी चम्मच तक, पर सिर्फ़ डॉक्टर की हाँ के बाद।
ये कोई लक्ष्य नहीं हैं जिन्हें पूरा करना ही है। पहले साल में बच्चे का मुख्य खाना दूध ही है, और घी कटोरी का बस एक छोटा हिस्सा है। किसी नई चीज़ के बाद बच्चे को दस्त हों, उल्टी हो या वह बेचैन लगे, तो रोक दीजिए और डॉक्टर से पूछिए।
घी डालें ही क्यों? बच्चे का पेट छोटा होता है और अपने आकार के हिसाब से उसे बहुत ऊर्जा चाहिए। घी की कुछ बूँदें पतली दाल या खिचड़ी को कटोरी बड़ी किए बिना ज़्यादा भरपूर बना देती हैं, और चिकनाई से शरीर विटामिन A, D, E और K का बेहतर इस्तेमाल करता है। इससे सादे खाने में ख़ुशबू भी आती है, जो नख़रे करने वाले बच्चे के लिए काम की चीज़ है।
बच्चे के खाने में घी कैसे मिलाएँ
घी सबसे अच्छा तब लगता है जब परोसने से ठीक पहले गरम, नरम खाने में मिलाया जाए। कुछ आसान पहले खाने जिनमें यह अच्छा बैठता है:
- मूँग दाल की खिचड़ी, ख़ूब नरम पकाकर और मसलकर
- गाढ़े, मसले हुए दाल-चावल, पतला दाल का पानी नहीं, क्योंकि उससे पेट तो भरता है पर ताक़त कम मिलती है
- मसली हुई सब्ज़ियाँ, जैसे लौकी, कद्दू, गाजर या आलू
- रागी या सूजी का गाढ़ा दलिया, इतना गाढ़ा कि चम्मच पर टिका रहे
- थोड़ा बड़ा होने पर दाल में भिगोकर मसली नरम रोटी
खाना सादा रखिए। आम सलाह यह है कि पहले साल में ऊपर से नमक और चीनी बिल्कुल न डालें, और इसमें गुड़ और वे मीठे मिश्रण भी आते हैं जो घर के बुज़ुर्ग बड़े चाव से मिलाते हैं। घी अपने आप में काफ़ी स्वाद दे देता है।
क्या घी से बच्चे का वज़न बढ़ता है?
यहाँ हम घरों में कही जाने वाली कई बातों से सहमत नहीं हैं। घी से ऊर्जा मिलती है, इसलिए बढ़ते बच्चे के खाने में थोड़ा घी मदद करता है। पर घी दुबले बच्चे की दवा नहीं है, और वज़न धीरे बढ़ रहा हो तो ज़्यादा घी उँडेलना इसका हल नहीं है।
स्वस्थ बच्चे हर आकार के होते हैं। आपके बच्चे के डॉक्टर ग्रोथ चार्ट पर बढ़त देखते हैं, और वह चार्ट बच्चा कितना गोल-मटोल दिखता है, उससे कहीं ज़्यादा बताता है। डॉक्टर को वज़न की चिंता हो, तो वजह खाना, कोई बीमारी या कुछ और भी हो सकता है जिसकी जाँच ज़रूरी है, और वे उसके हिसाब से रास्ता बताएँगे। ज़्यादा घी छोटे पेट को भर देता है और बच्चा दाल, सब्ज़ी और अनाज कम खाता है, जिनकी उसे ज़रूरत है। बच्चे को ज़बरदस्ती घी कभी मत खिलाइए।
गाय का घी, एलर्जी और शुद्धता
ज़्यादातर भारतीय परिवार बच्चों के लिए गाय का घी लेते हैं क्योंकि उसका स्वाद हल्का होता है, और हम भी घर पर यही देते हैं। भैंस का घी बड़ों के लिए ठीक है पर बहुत भारी है, इसलिए छोटे बच्चों के लिए शुरुआत गाय के घी से कीजिए।
घी में लैक्टोज़ लगभग नहीं होता और दूध के प्रोटीन के बस मामूली अंश होते हैं, इसलिए इससे दिक़्क़त कम ही होती है। फिर भी अगर बच्चे को गाय के दूध के प्रोटीन से एलर्जी पाई गई है, या डॉक्टर ने दूध की चीज़ों से दूर रखने को कहा है, तो घी देने से पहले पूछ लीजिए। हर नई चीज़ के साथ दाने, उल्टी या दस्त पर नज़र रखिए, और एक बार में एक ही नई चीज़ शुरू कीजिए।
बच्चे के लिए शुद्धता हमसे भी ज़्यादा ज़रूरी है। मिलावटी घी, जिसमें कोई दूसरी चिकनाई मिली हो, बच्चे की कटोरी में बिल्कुल नहीं होना चाहिए। हमारे लेख घी की शुद्धता कैसे जाँचें में घर पर करने वाली आसान जाँचें हैं।

बच्चों की घी से मालिश
बहुत से घरों में रोज़ की मालिश घी, सरसों के तेल या नारियल तेल से होती है, और किससे हो, इस पर दादी-नानी की राय बड़ी पक्की होती है। मालिश अपने आप में, नरम हाथ और गरम त्वचा, बच्चे से जुड़ने का बहुत प्यारा तरीक़ा है।
अगर आपके घर घी से मालिश होती है, तो गुनगुने घी की पतली परत ही लगाइए, गरम नहीं, और बाद में ज़्यादा घी पोंछ दीजिए। कटी-फटी त्वचा, दानों या एक्ज़िमा पर न लगाइए, और बच्चे की नाक, कान या आँख में घी या तेल कभी मत डालिए। गर्मी और उमस में भारी चिकनाई त्वचा पर बैठकर घमौरियाँ बढ़ा सकती है। कई बच्चों के डॉक्टर मालिश के लिए सादा, हल्का तेल पसंद करते हैं, इसलिए अपने डॉक्टर से पूछ लीजिए कि आपके बच्चे की त्वचा के लिए क्या ठीक है। और नवजात की नाल गिरने तक उस पर कुछ भी नहीं, इसकी वजह हमने नाभि में घी लगाने के फायदे में बताई है।
कुछ बूँदें, और डॉक्टर की बात
सोचें तो पुराना तरीक़ा और नया तरीक़ा बहुत दूर नहीं हैं। गाँव के बुज़ुर्ग बताते हैं कि पहले बच्चों को घी इसलिए दिया जाता था कि उन्हें ताक़त चाहिए थी और खाना अक्सर कम पड़ता था। आज के डॉक्टर भी कहते हैं कि बच्चे के खाने में थोड़ी चिकनाई अच्छी है। फ़र्क़ बस मात्रा का है, और इस बात का कि आख़िरी फ़ैसला उन डॉक्टर का हो जो हर महीने आपके बच्चे का वज़न देखते हैं।
बच्चों को घी कब देना चाहिए, यह तो डॉक्टर बताएँगे, और घर के बड़ों के लिए हमारे लेख देसी घी के फायदे और रोज़ कितना घी खाना चाहिए बाक़ी बातें बताते हैं। शुरुआत बूँदों से कीजिए, चम्मच से नहीं, और बहस ग्रोथ चार्ट को निपटाने दीजिए।
यह घी बनाने वाले एक परिवार की आम जानकारी है, डॉक्टरी सलाह नहीं।
लोग ये भी पूछते हैं
बच्चे को घी देना कब शुरू करें?
तभी, जब बच्चा ठोस खाना शुरू कर दे, यानी लगभग 6 महीने के बाद, और डॉक्टर की सलाह से। कुछ डॉक्टर ठोस खाने के शुरुआती हफ़्तों से कुछ बूँदें ठीक मानते हैं, कुछ 7 से 9 महीने तक रुकने को कहते हैं। 6 महीने से पहले माँ के दूध या फ़ॉर्मूला के सिवा कुछ नहीं।
बच्चे को कितना घी देना चाहिए?
एक बार के खाने में 2 से 3 बूँदों से शुरू करें। बच्चा मज़े से खाए तो धीरे-धीरे लगभग चौथाई छोटी चम्मच तक बढ़ाएँ। दो-तीन साल की उम्र तक एक चम्मच तक जैसी बड़ी मात्रा बच्चों के डॉक्टर से पूछकर ही तय करें।
क्या घी से बच्चे का वज़न बढ़ता है?
बच्चे के खाने में थोड़ा घी ऊर्जा देता है, पर यह वज़न बढ़ाने की दवा नहीं है। डॉक्टर को बढ़त की चिंता हो तो उसकी वजह की जाँच ज़रूरी है। ज़्यादा घी छोटे पेट को भर देता है और बच्चा बाक़ी चीज़ें कम खाता है।
क्या बच्चे की दाल और खिचड़ी में घी डाल सकते हैं?
हाँ, ठोस खाना शुरू होने के बाद और डॉक्टर की हाँ पर। परोसने से ठीक पहले गरम, नरम दाल-चावल, मूँग दाल की खिचड़ी या मसली सब्ज़ी में कुछ बूँदें मिलाएँ। पहले साल खाना सादा रखें, ऊपर से नमक या चीनी न डालें।
बच्चों के लिए गाय का घी अच्छा है या भैंस का?
ज़्यादातर भारतीय परिवार बच्चों के लिए गाय का घी लेते हैं क्योंकि उसका स्वाद हल्का होता है। भैंस का घी बहुत भारी होता है। जो भी घी हो, शुद्ध, ताज़ा और साफ़-सफ़ाई से रखा हुआ हो, और मात्रा थोड़ी रहे।
क्या बच्चे की घी से मालिश करना अच्छा है?
बहुत से घरों में बच्चों की मालिश घी से होती है। करें तो गुनगुने घी की पतली परत लगाएँ, कटी त्वचा और दानों पर न लगाएँ, और नाक, कान या आँख में कभी न डालें। कई डॉक्टर हल्का सादा तेल पसंद करते हैं, अपने डॉक्टर से पूछें।




