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देसी गाय का बिलोना घी
गहरी, सोंधी ख़ुशबू — रोटी, दाल और लड्डू पर ऊपर से डालने के लिए।
- 100% प्राकृतिककुछ मिलाया नहीं
- गाँव में बनाघरों के बैच
- कोई मिलावट नहींकोई प्रिज़र्वेटिव, रंग नहीं
- FSSAIलाइसेंस प्राप्त
मिट्टी के बर्तन में बना, हाथ से बिलोया, लकड़ी की आँच पर पका
देसी गाय का बिलोना घी वैसे ही बनता है जैसे फ़ैक्ट्रियों से पहले शेखावाटी के हर घर में घी बनता था: पूरे दूध की दही, लकड़ी का बिलोना और मिट्टी के बर्तन — एक-एक छोटा बैच।
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1मिट्टी के मटके में दही
देसी गाय का पूरा दूध चूल्हे पर उबालकर रात भर मिट्टी के मटके में गाढ़ी दही जमाई जाती है।
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2लकड़ी के बिलोने से मथना
सुबह उसी मटके में दही को हाथ से बिलोया जाता है, जब तक मक्खन ऊपर न आ जाए। न मशीन, न क्रीम सेपरेटर।
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3
मिट्टी की हांडी में धीमी आँच
मक्खन को मिट्टी की हांडी में लकड़ी और कंडे की धीमी आँच पर तब तक पकाया जाता है जब तक घी साफ़ न हो जाए।
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4सुनहरा, सोंधा और दानेदार
एक किलो घी में 25–30 लीटर दूध लगता है। छानकर उसी हफ़्ते सील किया जाता है।
- पूरे दूध की दही, मलाई नहीं
- मिट्टी का मटका और हांडी
- लकड़ी का बिलोना, हाथ से
- लकड़ी और कंडे की आँच
- हर हफ़्ते छोटे बैच
असली घी का एक चम्मच सेहत के लिए अच्छा क्यों है
कोई सप्लीमेंट नहीं, कोई फ़ैशन नहीं — वही चर्बी जिससे भारतीय रसोइयाँ हज़ारों साल से पकाती आई हैं, धीमे तरीक़े से बनी ताकि न कुछ मिले, न कुछ खोए।
घी वसा में घुलने वाले विटामिनों का प्राकृतिक स्रोत है — जो शरीर चर्बी के साथ ही सबसे अच्छे से सोखता है।
क़रीब 250 °C का स्मोक पॉइंट — ज़्यादातर रिफ़ाइंड तेलों से ऊपर — इसलिए गरम तड़के या पराठे के तवे पर यह टूटता नहीं।
धीमी आँच पर पकाने से लगभग सारा लैक्टोज़ और दूध के ठोस निकल जाते हैं। कई लोग जो दूध नहीं लेते, घी आराम से खाते हैं।
गाँव के हर घर में रोटी या दाल पर घी का चम्मच रोज़ का खाना है, कोई शौक़ नहीं — आयुर्वेद सदियों से इसे पौष्टिक कहता आया है।
सर्दी घी का मौसम है
जब सर्दी उतरती है, शेखावाटी की हर रसोई घी के जार की ओर हाथ बढ़ाती है: यह शरीर को गरम रखता है, त्वचा और जोड़ों को सूखने नहीं देता, और सर्दी के खाने को वो बना देता है जिसका साल भर इंतज़ार रहता है।

घी एक चर्बी है — इसे वैसे ही खाएँ जैसे गाँव के घर खाते हैं: रोज़ के खाने में एक-दो चम्मच। यह खाना है, चिकित्सा सलाह नहीं।
इस जार में क्या-क्या है
म्हारा देसी गाय का बिलोना घी पिलानी के पास गाँव के घरों में पली देसी गायों के दूध से बनता है। पूरा दूध रात भर मिट्टी के मटके में दही बनकर जमता है, लकड़ी के बिलोने से हाथ से मथा जाता है, और मक्खन को मिट्टी की हांडी में लकड़ी की धीमी आँच पर सुनहरा होने तक पकाया जाता है। एक किलो घी के लिए 25–30 लीटर दूध लगता है, और यह स्वाद में दिखता है: गहरी, सोंधी ख़ुशबू और ऐसा स्वाद जो भारी नहीं लगता।

घरों के देसी पशुओं का दूध, उसी सुबह जमाया और मथा।
डेयरी फ़ार्म का दूध नहीं।
शुद्धता के लिए सील।
रोज़ का इस्तेमाल, बच्चे, पूजा।
दाने जमाने के लिए धीरे-धीरे ठंडा किया।
देसी गाय का पूरा दूध चूल्हे पर उबालकर रात भर मिट्टी के मटके में दही जमाई जाती है। सुबह दही को लकड़ी के बिलोने से हाथ से मथा जाता है, जब तक मक्खन ऊपर न आ जाए। मक्खन को मिट्टी की हांडी में लकड़ी और कंडे की धीमी आँच पर तब तक पकाया जाता है जब तक घी साफ़ और दानेदार न हो जाए। हर बैच चखकर उसी हफ़्ते सील किया जाता है।
ठंडी, सूखी जगह। सूखा चम्मच।
और कुछ नहीं। इसमें दूध है।
चूल्हे से आपके जार तक

दही
देसी गाय का पूरा दूध चूल्हे पर उबालकर रात भर मिट्टी के मटके में जमाया।

बिलोना
मटके में लकड़ी के बिलोने से हाथ से मथा, जब तक मक्खन ऊपर न आ जाए।

धीमी आँच
मक्खन को मिट्टी की हांडी में लकड़ी की धीमी आँच पर पकाया।

घी
तब तक पकाया जब तक साफ़, सोंधा और सुनहरा न हो जाए।

म्हारा जार
छानकर जार या टिन में सील किया।

रोज़ का इस्तेमाल, बच्चे, पूजा
गहरी, सोंधी ख़ुशबू और साफ़ स्वाद जो भारी नहीं लगता — यह वो जार है जो ऊपर से डाला जाता है।
म्हारा का कौन सा घी आपके लिए?
देसी गाय का बिलोना घीबेस्टसेलर · ₹1,099 से
देसी भैंस का घीमिठाई के लिए · ₹1,049 सेजानकारी
इस घी के बारे में
कैसे बनता है
सामग्री और रख-रखाव
डिलीवरी और वापसी
सर्दी में घी अलग क्यों दिखता है?
🤝 म्हारा का वादा
- 🫙कभी कुछ मिलाया नहींकोई प्रिज़र्वेटिव, रंग या फ़्लेवर नहीं — सिर्फ़ दूध की चर्बी, जैसे हमेशा से बनता आया है।
- 🫙जार टूटा? मुफ़्त बदल देंगे।डिब्बा खोलते समय वीडियो बनाएँ, 24 घंटे में WhatsApp पर भेजें — नया जार मुफ़्त रवाना। कैसे काम करता है
- 🏡नाम से जाने-पहचाने घरों सेहमें पता है दूध किसके पशु का है। यही तो पूरी बात है।
- 📞इंसान से बात करेंWhatsApp +91 93624 29093
ग्राहक क्या कहते हैं
इस घी के बारे में पूछे गए सवाल
देसी गाय का बिलोना घी कैसे बनता है?
देसी गाय के पूरे दूध को उबालकर रात भर दही जमाया जाता है। फिर लकड़ी के बिलोने से हाथ से मथकर मक्खन निकाला जाता है, और मक्खन को धीमी आँच पर पकाकर, छानकर काँच के जार में बंद किया जाता है।
सर्दी में मेरा घी जम क्यों गया?
घी लगभग पूरा दूध की वसा है, और इसका बड़ा हिस्सा 20–25 °C से नीचे जमने लगता है। घी ख़राब नहीं हुआ है। जार को कुछ मिनट गुनगुने पानी में रखें, घी फिर पिघल जाएगा।
घी कैसे रखें?
ढक्कन बंद रखें, सूखी चम्मच इस्तेमाल करें और जार को चूल्हे की आँच से दूर रखें। फ़्रिज की ज़रूरत नहीं है। जार पर छपी बेस्ट-बिफ़ोर तारीख़ देख लें।
अगर जार टूटा हुआ पहुँचे तो?
बॉक्स खोलने से पहले फ़ोन पर वीडियो चालू कर लें। जार टूटा मिले तो वह वीडियो 24 घंटे के अंदर WhatsApp पर भेजें, हम नया जार मुफ़्त भेज देंगे।
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