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मिठाई के लिए · गाढ़ा और मलाईदार
देसी भैंस का घी जार
म्हारा कलेक्शन · भैंस का घी

देसी भैंस का घी

देसी भैंस का घी

गाढ़ा और मलाईदार — मिठाई, चूरमा और त्योहार के खाने के लिए।

गाँव में बना · काँच का जार · मुफ़्त डिलीवरी
  • 100% प्राकृतिककुछ मिलाया नहीं
  • गाँव में बनाघरों के बैच
  • कोई मिलावट नहींकोई प्रिज़र्वेटिव, रंग नहीं
  • FSSAIलाइसेंस प्राप्त
इस बैच में 1 litre के 30 जार बचे हैं
30 जार का बैच · नवं 2026✦ ताज़ा बैच
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₹1,899₹2,499
1 लीटर काँच का जार · ₹190 प्रति 100 मि.ली. · MRP सभी कर सहित · मुफ़्त डिलीवरी
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2 दिन में रवानापूरे भारत में मुफ़्त डिलीवरीटूटा जार बदल देंगे
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बिलोना का तरीका

मिट्टी के बर्तन में बना, हाथ से बिलोया, लकड़ी की आँच पर पका

देसी भैंस का घी वैसे ही बनता है जैसे फ़ैक्ट्रियों से पहले शेखावाटी के हर घर में घी बनता था: पूरे दूध की दही, लकड़ी का बिलोना और मिट्टी के बर्तन — एक-एक छोटा बैच।

  1. मिट्टी के मटके में दही — देसी भैंस का घी1

    मिट्टी के मटके में दही

    भैंस का पूरा दूध चूल्हे पर उबालकर रात भर मिट्टी के मटके में गाढ़ी दही जमाई जाती है।

  2. लकड़ी के बिलोने से मथना — देसी भैंस का घी2

    लकड़ी के बिलोने से मथना

    सुबह उसी मटके में दही को हाथ से बिलोया जाता है, जब तक मक्खन ऊपर न आ जाए। न मशीन, न क्रीम सेपरेटर।

  3. 3

    मिट्टी की हांडी में धीमी आँच

    मक्खन को मिट्टी की हांडी में लकड़ी और कंडे की धीमी आँच पर तब तक पकाया जाता है जब तक घी साफ़ न हो जाए।

  4. सफ़ेद, गाढ़ा और मलाईदार — देसी भैंस का घी4

    सफ़ेद, गाढ़ा और मलाईदार

    छानकर उसी हफ़्ते सील किया जाता है। राजस्थान के घरों में लड्डू, हलवे और चूरमे के लिए यही घी रखा जाता है।

  • पूरे दूध की दही, मलाई नहीं
  • मिट्टी का मटका और हांडी
  • लकड़ी का बिलोना, हाथ से
  • लकड़ी और कंडे की आँच
  • हर हफ़्ते छोटे बैच
घी और सेहत

असली घी का एक चम्मच सेहत के लिए अच्छा क्यों है

घी और सेहत

कोई सप्लीमेंट नहीं, कोई फ़ैशन नहीं — वही चर्बी जिससे भारतीय रसोइयाँ हज़ारों साल से पकाती आई हैं, धीमे तरीक़े से बनी ताकि न कुछ मिले, न कुछ खोए।

🌞विटामिन A, D, E और K

घी वसा में घुलने वाले विटामिनों का प्राकृतिक स्रोत है — जो शरीर चर्बी के साथ ही सबसे अच्छे से सोखता है।

🔥तेज़ आँच पर भी पकता है

क़रीब 250 °C का स्मोक पॉइंट — ज़्यादातर रिफ़ाइंड तेलों से ऊपर — इसलिए गरम तड़के या पराठे के तवे पर यह टूटता नहीं।

🥛पेट के लिए हल्का

धीमी आँच पर पकाने से लगभग सारा लैक्टोज़ और दूध के ठोस निकल जाते हैं। कई लोग जो दूध नहीं लेते, घी आराम से खाते हैं।

🪔रोज़ एक चम्मच, पुराने तरीक़े से

गाँव के हर घर में रोटी या दाल पर घी का चम्मच रोज़ का खाना है, कोई शौक़ नहीं — आयुर्वेद सदियों से इसे पौष्टिक कहता आया है।

मौसम का ख़ास

सर्दी घी का मौसम है

सर्दी आ रही है — घी का मौसम

जब सर्दी उतरती है, शेखावाटी की हर रसोई घी के जार की ओर हाथ बढ़ाती है: यह शरीर को गरम रखता है, त्वचा और जोड़ों को सूखने नहीं देता, और सर्दी के खाने को वो बना देता है जिसका साल भर इंतज़ार रहता है।

गोंद के लड्डूचूरमामूँग दाल का हलवागाजर का हलवापंजीरीबेसन की बर्फ़ी
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घी एक चर्बी है — इसे वैसे ही खाएँ जैसे गाँव के घर खाते हैं: रोज़ के खाने में एक-दो चम्मच। यह खाना है, चिकित्सा सलाह नहीं।

एक नज़र में

इस जार में क्या-क्या है

एक नज़र में

म्हारा देसी भैंस का घी उन्हीं गाँव के घरों में पली भैंसों के दूध से बनता है। भैंस का दूध ज़्यादा गाढ़ा होता है, इसलिए घी भारी, ज़्यादा सफ़ेद और उस गहरे स्वाद वाला होता है जो त्योहार की मिठाइयों को चाहिए। हमारे गाय के घी की तरह यह भी बिलोना तरीके से बनता है: मिट्टी के मटके में जमी दही, लकड़ी के बिलोने से हाथ से मथी, और मिट्टी की हांडी में लकड़ी की धीमी आँच पर पकाया, फिर उसी हफ़्ते सील किया।

गाँव सेशेखावाटी, झुंझुनू

घरों के देसी पशुओं का दूध, उसी सुबह जमाया और मथा।

🥛दूधदेसी भैंस का पूरा दूध

डेयरी फ़ार्म का दूध नहीं।

🫙शुद्ध मात्रा500 मि.ली. · 1 लीटर · 2 लीटर · 5 लीटर

शुद्धता के लिए सील।

✨ख़ुशबूगाढ़ी, तेज़

मिठाई, हलवा, लड्डू।

🌾बनावटचिकना, सफ़ेदी लिए

दाने जमाने के लिए धीरे-धीरे ठंडा किया।

🔥विधिबिलोना विधि · मिट्टी के मटके की दही, हाथ से मथा

भैंस का पूरा दूध चूल्हे पर उबालकर रात भर मिट्टी के मटके में दही जमाई जाती है। सुबह दही को लकड़ी के बिलोने से हाथ से मथा जाता है, जब तक मक्खन ऊपर न आ जाए। मक्खन को मिट्टी की हांडी में लकड़ी और कंडे की धीमी आँच पर तब तक पकाया जाता है जब तक घी साफ़ और दानेदार न हो जाए। हर बैच चखकर उसी हफ़्ते सील किया जाता है।

📅कितने दिन चलेगा12 महीने

ठंडी, सूखी जगह। सूखा चम्मच।

🧪सामग्री100% देसी भैंस के दूध की चर्बी

और कुछ नहीं। इसमें दूध है।

कैसे बनता है

चूल्हे से आपके जार तक

चूल्हे से आपके घर तक
1

दही

मिट्टी के मटके में दही

भैंस का पूरा दूध चूल्हे पर उबालकर रात भर मिट्टी के मटके में जमाया।

2

बिलोना

लकड़ी के बिलोने से

मटके में लकड़ी के बिलोने से हाथ से मथा, जब तक मक्खन ऊपर न आ जाए।

3

धीमी आँच

मिट्टी की हांडी में

मक्खन को मिट्टी की हांडी में लकड़ी की धीमी आँच पर पकाया।

4

घी

सफ़ेद, मलाईदार

तब तक पकाया जब तक साफ़, सफ़ेद और मलाईदार न हो जाए।

5

म्हारा जार

छानकर, सील बंद

छानकर जार या टिन में सील किया।

सबसे अच्छा

मिठाई, हलवा, लड्डू

सफ़ेद, गाढ़ा और मलाईदार — लड्डू, हलवा और चूरमे को असली स्वाद यही देता है।

🍮लड्डू, हलवा और चूरमा
🥣त्योहार और बड़ी रसोई
🫓दाल-बाटी और गाढ़ा तड़का
🍚सर्दी के गोंद के लड्डू
“मिठाई का असली स्वाद भैंस के घी से ही आता है।”— म्हारा, शेखावाटी
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म्हारा का कौन सा घी आपके लिए?

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देसी गाय का बिलोना घीबेस्टसेलर · ₹1,099 से
देसी भैंस का घीमिठाई के लिए · ₹1,049 से
विधि
बिलोना विधि · मिट्टी के मटके की दही, हाथ से मथा
बिलोना विधि · मिट्टी के मटके की दही, हाथ से मथा
ख़ुशबू
गहरी, सोंधी, मिट्टी-सी
गाढ़ी, तेज़
बनावट
महीन दाने, सुनहरा
चिकना, सफ़ेदी लिए
सबसे अच्छा
रोज़ का इस्तेमाल, बच्चे, पूजा
मिठाई, हलवा, लड्डू
जानना ज़रूरी

जानकारी

इस घी के बारे में
म्हारा देसी भैंस का घी उन्हीं गाँव के घरों में पली भैंसों के दूध से बनता है। भैंस का दूध ज़्यादा गाढ़ा होता है, इसलिए घी भारी, ज़्यादा सफ़ेद और उस गहरे स्वाद वाला होता है जो त्योहार की मिठाइयों को चाहिए। हमारे गाय के घी की तरह यह भी बिलोना तरीके से बनता है: मिट्टी के मटके में जमी दही, लकड़ी के बिलोने से हाथ से मथी, और मिट्टी की हांडी में लकड़ी की धीमी आँच पर पकाया, फिर उसी हफ़्ते सील किया।
कैसे बनता है
भैंस का पूरा दूध चूल्हे पर उबालकर रात भर मिट्टी के मटके में दही जमाई जाती है। सुबह दही को लकड़ी के बिलोने से हाथ से मथा जाता है, जब तक मक्खन ऊपर न आ जाए। मक्खन को मिट्टी की हांडी में लकड़ी और कंडे की धीमी आँच पर तब तक पकाया जाता है जब तक घी साफ़ और दानेदार न हो जाए। हर बैच चखकर उसी हफ़्ते सील किया जाता है।
सामग्री और रख-रखाव
सामग्री: 100% देसी भैंस के दूध की चर्बी. एलर्जी की जानकारी: इसमें दूध है। कोई प्रिज़र्वेटिव, रंग या फ़्लेवर नहीं। ठंडी, सूखी जगह पर धूप से दूर रखें। सूखा चम्मच इस्तेमाल करें। बनने की तारीख़ से 12 महीने के अंदर इस्तेमाल करें। FSSAI लाइसेंस नं. 21623001000189.
डिलीवरी और वापसी
2 कार्य-दिवस में क्राफ़्ट डिब्बे में बबल रैप के साथ रवाना। पूरे भारत में मुफ़्त डिलीवरी, आमतौर पर 3–6 दिन। अगर जार टूटा हुआ मिले, 24 घंटे में WhatsApp पर अनबॉक्सिंग वीडियो भेजें, मुफ़्त बदल देंगे — देखें जार गारंटी, हमारी शिपिंग और रिफ़ंड नीतियाँ।
सर्दी में घी अलग क्यों दिखता है?
शुद्ध घी क़रीब 20 °C से नीचे जमकर दानेदार हो जाता है और गर्मी में पिघल जाता है। दोनों सामान्य हैं — इसे एक जैसा रखने के लिए कुछ मिलाया नहीं जाता।

🤝 म्हारा का वादा

  • 🫙
    कभी कुछ मिलाया नहींकोई प्रिज़र्वेटिव, रंग या फ़्लेवर नहीं — सिर्फ़ दूध की चर्बी, जैसे हमेशा से बनता आया है।
  • 🫙
    जार टूटा? मुफ़्त बदल देंगे।डिब्बा खोलते समय वीडियो बनाएँ, 24 घंटे में WhatsApp पर भेजें — नया जार मुफ़्त रवाना। कैसे काम करता है
  • 🏡
    नाम से जाने-पहचाने घरों सेहमें पता है दूध किसके पशु का है। यही तो पूरी बात है।
  • 📞
    इंसान से बात करेंWhatsApp +91 93624 29093
म्हारे घर का, थारे घर तक।
असली रसोइयों से

ग्राहक क्या कहते हैं

ग्राहकों की राय
पहला बैच

पहली रसोइयाँ, पहली राय

यह गाँव से हमारा पहला बैच है — जार अभी-अभी पहली रसोइयों तक पहुँच रहे हैं। यहाँ जो भी रिव्यू दिखेगा, असली ऑर्डर से आएगा, पीछे ऑर्डर नंबर के साथ। न हमारा लिखा, न ख़रीदा हुआ।

— म्हारा, शेखावाटी

ऑर्डर कर चुके हैं?

आपके डिलीवरी ईमेल और WhatsApp में एक-टैप रिव्यू लिंक है — या नीचे अपना ऑर्डर ढूँढें।

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✓ सिर्फ़ प्रमाणित ख़रीदार ही रिव्यू कर सकते हैं
सवाल-जवाब

इस घी के बारे में पूछे गए सवाल

भैंस का घी सफ़ेद क्यों होता है?

गाय का घी चारे के बीटा-कैरोटीन की वजह से पीला होता है। भैंस इस रंग को विटामिन A में बदल देती है, इसलिए उसका दूध और उससे बना घी सफ़ेद निकलता है।

देसी भैंस का घी कैसे बनता है?

भैंस के पूरे दूध की दही जमाई जाती है, लकड़ी के बिलोने से मथकर मक्खन निकाला जाता है, और मक्खन को धीमी आँच पर पकाकर, छानकर काँच के जार में बंद किया जाता है।

भैंस का घी किस काम के लिए सबसे अच्छा है?

यह गाय के घी से ज़्यादा भारी और मलाईदार होता है, इसलिए राजस्थान के घरों में लड्डू, हलवा, चूरमा और मिठाइयों के लिए यही लिया जाता है। रोज़ के खाने में भी चलता है।

सर्दी में यह गाय के घी से ज़्यादा सख़्त क्यों जमता है?

भैंस के दूध की वसा में ऊँचे तापमान पर जमने वाली वसाएँ ज़्यादा होती हैं, इसलिए भैंस का घी जल्दी जमता है। जार को कुछ मिनट गुनगुने पानी में रखें, नरम हो जाएगा।

अगर जार टूटा हुआ पहुँचे तो?

बॉक्स खोलने से पहले फ़ोन पर वीडियो चालू कर लें। जार टूटा मिले तो वह वीडियो 24 घंटे के अंदर WhatsApp पर भेजें, हम नया जार मुफ़्त भेज देंगे।

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कुकीज़ के बारे में एक छोटी बातहम Google Analytics से समझते हैं कि लोगों को कौन-सा घी पसंद है, और Meta Pixel से साइट पर आए लोगों को Facebook, Instagram और WhatsApp पर हमारा घी दिखाते हैं। आपका नाम, फ़ोन और पता कभी साझा नहीं होता, कुछ बेचा नहीं जाता। प्राइवेसी पॉलिसी